
पाली मेडिकल कॉलेज में देहदान करते परिजन।
पाली मेडिकल कॉलेज के साथ प्रदेश में अन्य मेडिकल कॉलेज खुले थे, लेकिन सबसे अधिक देहदान पाली मेडिकल कॉलेज में अब तक 18 हुए है। कॉलेज में दान होने वाली इन देहों से एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। कॉलेज में बुधवार को खौड़ निवासी तेजाराम की देह का दान किया गया।
खौड़ गांव के रहने वाले तेजाराम (95 वर्ष) का 14 नवम्बर को गांव में निधन हो गया। इस पर उनके पुत्र रूपाराम ने मेडिकल कॉलेज शरीर रचना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनूपसिंह गुर्जर से संपर्क किया। उनको बताया कि तेजाराम ने देहदान के लिए शपथ पत्र दिया था। इस पर मेडिकल कॉलेज ने देह लेने के लिए सहमति दी। देहदान के दौरान देहदान के समय रुपारामदास खौड, तुलसी बाई, कैलाशदास, नरेशदास, राजाराम मेवाड़ा, कैलाश मेवाड़ा, पप्पू मेवाड़ा, दुर्गाराम कुमावत, नेमाराम सीरवी, नाराराम मेघवाल, ओपारामदास खौड, बगदाराम दास आदि के साथ परिजन व ग्रामीण मौजूद रहे। उन्होंने दिवंगत आत्मा को नमन किया। देहदान के बाद दिवंगत के परिजनों को प्रमाण पत्र दिया गया।
देह को किया सुरक्षित
देहदान के बाद इसी वर्ष शुरू हुए पीजी पाठ्यक्रम के रेजीडेंट चिकित्सक सुरेश चौधरी, अमित जोशी, अदिति सोलंकी, किरण कंवर व विभाग के तकनीशियन अरुण कुमार, विजय लक्ष्मी, अर्जुन परिहार व मोहन परमार ने शरीर ऐंबलमिंग ( शरीर पर केमिकल लगाना) की। इससे देह लंबे समय तक अनुसंधान के लिए सुरक्षित रहेगी। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व नियंत्रक डॉ. दीपक वर्मा ने कहा कि यह देह पीजी व यूजी अध्यन के साथ अनुसंधान के उपयोग में आएगी।
Published on:
15 Nov 2023 07:05 pm
