
दुल्हन सी सजी किन्नरों की ‘हवेली’, गूंज रहे मंगल गीत, गरीब बेटियों के ‘निराशामय’ जीवन में खुशियां भर रही ‘आशा’
पाली। किन्नर समाज की हवेली इनदिनों दुल्हन सी सजी है। यहां न सिर्फ मंगलगीत गूंज रहे हैं, बल्कि विवाहोत्सव की उन सभी रस्मों की खुशियां घर-आंगन महका रही है, जो आमतौर पर एक शादी वाले घरों में चहकती है। हवेली के कंगूरों से फर्श तक लटक रही रंग-बिरंगी लाइटों की लडिय़ां बता रही है कि पाली का किन्नर समाज इनदिनों बहुत खुश है। खुश हो भी क्यों नहीं, गादीपति आशा कंवर की अगुवाई में पूरा किन्नर समाज एक ऐसी बेटी के हाथ पीले करने जा रहा है। बीस बेटियों के हाथ पीले करवा उन्हें सुखद दांपत्य जीवन की राह पकड़ा चुकी गादीपति आशा कंवर 24 नवम्बर को गोद ली हुई बेटी कोमल के परिणय बंधन के लिए उसके कोमल हाथों पर मेहन्दी रचा रही है।
ऐसे समेट ली खुशियों की चादर
शहर के पुराना बस स्टैंड किन्नरों की हवेली की गादीपति आशा कंवर के नजदीक ही कोमल का परिवार किराये के मकान में रहता है। कोमल के पिता ढोलक वादक है। आशा कंवर ने कोमल को गोद लिया। उसका लालन-पालन करने के बाद अब विवाह करवा रही है। बीकानेर के नोखा पहुंचकर पवन को वर के रूप में चुना।
हर रस्म विधि-विधान से
कोमल का विवाह 24 नवम्बर को सुराणा सराय से होगा। विवाह को लेकर 22 नवम्बर को पाट बिठाने के साथ विवाह की रस्में शुरू की गई। उसके लिए स्वर्णाभूषण समेत चांदी के जेवरात, वेश आदि तैयार करवाए है।
हर विपत्ति में मिला पाली को किन्नर समाज का साथ
पाली का किन्नर समाज अब तक 21 बेटियों के हाथ पीले करवा चुका है। कोरोनाकाल में जरूरतमंदों को राशन सामग्री बांटना, नया गांव में गरीब दंपती को मकान बनाकर देना, महावीर इंटरनेशनल की ओर से संचालित रसोई में सब्जी मुहैया कराना, कोरोनाकाल में लोक कलाकारों को आर्थिक मदद करने सहित हवेली की दहलीज से हर मुमकिन सहायता कर मिसाल पेश की जा रही है।
पिछले साल करवाए थे दो बहनों के हाथ पीले
पिछले साल नवम्बर में कमला रजक की दो पुत्रियों अंजली व लक्ष्मी के हाथ पीले करवाए थे। उदयपुर के राजेश ने लक्ष्मी तथा राणावास के गौतम ने अंजली का हाथ थामकर किन्नर समुदाय की मेजबानी में वैवाहिक जीवन की शुरुआत की थी। इस बार के विवाह समारोह में हमीराराम राईका समेत कई ख्यातनाम कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
कन्यादान सबसे बड़ा दान
कन्या दान से बड़ा कोई दान नहीं है। जीवन में किसी का भला करने से जो खुशी मिलती है, वह कही नहीं है। गरीब की बेटी के हाथ खुद के हाथों से पीले हो रहे हैं, इससे बड़ी खुशी कोई हो ही नहीं सकती। -आशा कंवर, गादीपति, किन्नर समाज पाली
Updated on:
24 Nov 2021 08:24 am
Published on:
24 Nov 2021 07:52 am
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