पाली। विधिक सेवा समिति बाली, सोजत, जैतारण, सुमेरपुर, मारवाड जंक्शन, देसुरी, बर, सादडी, रायपुर न्यायालय परिसर में न्यायालयों में लंबित विभिन्न प्रकृति के प्रकरणों, राजस्व प्रकरणों एवं प्री-लिटिगेशन विवादों से संबंधित राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला मुख्यालय पर प्रकरणों के निस्तारण के लिए 5 लोक अदालत बैंचो का गठन किया गया, जिसमें से 1 बैंच प्री लिटिगेशन प्रकरणों की एवं 04 बैंचें पोस्ट टीगेशन प्रकरणों के लिए थी। इन बैन्च के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा न्यायालय में लंबित प्रकरणों एवं बैंकों/वित्तीय संस्थानों एवं दूरसंचार विभाग के प्रि-लिटिगेशन प्रकरणों में समझाईश कर राजीनामा का प्रयास करवाया गया। इसी प्रकार ताल्लुका विधिक सेवा समिति, बाली, सोजत, जैतारण, सुमेरपुर, देसूरी, बर, मारवाड जंक्शन, सादडी एवं गा्रम न्यायालय रायपुर पर भी 12 बैंचो द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन कर प्रकरणों का निस्तारण किया गया।
देवेन्द्र सिंह भाटी, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि इन लोक अदालत में सम्पूर्ण पाली न्यायक्षेत्र में पोस्ट लिटिगेशन के 7519 एवं प्री-लिटिगेशन के 30709 प्रकरणो सहित कुल 38228 प्रकरणों को रखा गया, जिनमे समझाईश द्वारा प्री-लिटिगेशन के 27986 एवं पोस्ट लिटिगेशन के 3574 प्रकरण कुल 31560 प्रकरण निस्तारित किए गए तथा कुल 12.62 करोड राशि का अवार्ड पारित किया गया।
कांस्टेबल को मिला न्याय
सुमेरपुर हाल कोतवाली थाने में तैनात कॉन्स्टेबल प्रेमप्रकाश, जिसका पंजाब नेशनल बैंक में एकाउंट है। उन्होंने हाऊसिंग बोर्ड में एसबीआई के एटीएम से पांच हजार विड्रॉल किए, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते रुपए विड्रॉल नहीं हुए और उनके एकाउंट से रुपए कट गए। इस पर कॉन्स्टेबल ने दोनों बैंकों में अपनी शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन रुपए वापस उनके एकाउंट में जमा नहीं किए। दोनों बैंक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रहे। आखिरकार पीड़ित कॉन्स्टेबल ने एडवोकेट अरिहन्त चौपड़ा के जरिए स्थाई लोक अदालत में नवम्बर 2019 में परिवाद दायर किया।
11 फरवरी 2023 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में इस मामले पर न्यायाधीश प्रेमप्रकाश गुप्ता, सदस्य मेहनाज संमा ने सुनवाई की। पीड़ित की और से एडवोकेट अरिहन्त चौपड़ा, प्रवीण साहू और एसबीआई बैंक से क्रेडिट ऑफिसर अतुल जोशी पहुंचे। जिसमें बैंक के ऑफिसर ने 5 हजार रुपए पीड़ित कांस्टेबल को अगले तीन दिन में देने को लेकर राजी हो गए। इस पर दोनों पक्षों में राजीनामा हुआ।