
मारवाड़ का पश्चिमी द्वार : गौरवपूर्ण इतिहास को समेटे है रायपुर मारवाड़
पाली/बर मारवाड़। मारवाड़ रियासत के अंतिम छोर व पाली मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर स्थित रायपुर मारवाड़ में प्राचीन काल से ही शौर्य, राष्ट्रीय प्रेम, बलिदान की परम्परा रही हैं। कृषि से लेकर रण क्षेत्र तक अपने वैभव और शौर्य के कीर्तिमान स्थापित किए हुए है। ये रामस्नेही सन्त मुरलीराम महाराज, सीताराम व बालकदास महाराज की तपोभूमि से भी जाना जाता है। रायपुर मारवाड़ ठिकाना अपनी सेना के शौर्य पराक्रम से भी जाना जाता था। एक जमाने में लाल सूखी मिर्ची के लिए पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध था, लेकिन अब वो पहचान धीरे-धीरे खोने लगी है। करीब पंद्रह हजार की आबादी वाले इस गांव में एक अति प्राचीन पंचमुखी गणेश मूर्ति के साथ मंदिर है। जो लगभग चार सदी पुराना है। कस्बे से एक किलोमीटर दूर स्थित हजरत हुसैन पीर बाबा की दरगाह की। जहां हर रोज साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की जाती है। यहां श्रद्धालुओं व जायरीनों की रेमपेल एक साथ देखने को मिलती है। अजान और आरती एक साथ होती है।
अब भी समस्याओं का अम्बार
यहां रायपुर लूनी बांध से मीठे पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन करीब 15 से 16 हजार की आबादी वाले इस गांव में समस्या का अंबार भी कम नहीं है। चिकित्सा को लेकर यहां के लोग लंबे समय से सीएससी में चिकित्सकों की मांग कर रहे हैं। यहां बड़े स्तर पर भूमाफि या डेरा डालकर सरकारी व डोलियों पर कब्जा करने की फि राक में रहते हैं। लूनी नदी को बजरी माफिया ने छलनी कर दिया है। यहां के लोग ट्रेनों के ठहराव के अभाव में ब्यावर, अजमेर, पाली, जोधपुर जाने को मजबूर हैं। उपखंड मुख्यालय होते हुए भी रोडवेज बसों की बड़ी समस्या है।
भारत की आजादी के लिए यहां होती थी सभाएं
मारवाड़ प्रान्त में देश को गुलामी से मुक्त करवाने का बिगुल रायपुर से बजा था। कस्बे ने आजादी की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। यहां अंग्रेजो की आवाजाही नहीं के बराबर थी। इसी का फ ायदा क्रांतिकारियों ने उठाया और रायपुर मारवाड़ में आजादी को लेकर बड़े स्तर पर सभाएं किया करते थे।
धार्मिक आस्था का केन्द्र
यहां करीब चार सदी पुराना गणेश मंदिर है। मंदिर के पुजारी सूर्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि पूरी दुनिया में यह दूसरा मंदिर है जहां भगवान गणेश अपने पूर्ण परिवार के साथ विराजमान हैं। पंचमुखी प्रतिमा का पहला मंदिर रणत भंवर में है। दूसरी तरफ रामस्नेही संत मुरली महाराज, संत सीताराम व सन्त बालकदास महाराज की तपोभूमि है। मुख्य बाजार में रामस्नेही सम्प्रदाय के रामद्वारा में वर्षों से महाराज की चादर आज भी मौजूद है।
देश सेवा से जुड़ा है इतिहास
देश-विदेश तक रायपुर का दबदबा रहा है। यहां से सूरीनाम दक्षिण अमेरिका में भारतीय दूतावास में सेक्शन अधिकारी के पद पर महेशकुमार सोनिगरा वर्तमान में सेवा दे रहे हैं। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल इंदरजीतसिंह उदावत ने सेना में सेवा दी। करीब एक दर्जन से ज्यादा युवा सुरक्षा एजेंसियों में देश सेवा कर रहे हैं। राज्य में भी कई आरएएस प्रशासनिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वरिष्ठ आईएएस व राज्य के मुख्य सचिव निरंजन आर्य की प्रारंभिक शिक्षा यहां के सरकारी स्कूल में हुई। आर्य का बचपन रायपुर की गलियों में गुजरा है। हास्य कवि व अभिनय से पहचान बनाने वाले हास्य कवि व तारक मेहता का उल्टा चश्मा में तारक मेहता की भूमिका निभाने वाले शैलेश लोढा ने रायपुर से शिक्षा ग्रहण की।
आजादी से पहले बना हरिपुर स्टेशन
हरिपुर रेलवे स्टेशन का निर्माण आज से करीब सौ वर्ष पूर्व ठाकुर गोविन्दसिंह द्वारा करवाया गया था। ट्रेन का ठहराव करवाने के लिए अंग्रेज अधिकारियों के कहने पर फ़ स्र्ट क्लास वेटिंग रूम का निर्माण करवाया। यहां ठाकुर रोज कई वर्षों तक 4 प्रथम श्रेणी टिकट खऱीदते थे।
Published on:
16 Jun 2021 09:38 am
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