
Acharya Bhikshu: आज आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी: इस महान विभूति को करें नमन
तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक आचार्य भिक्षु को उनके जन्म दिवस आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को ही बौद्ध प्राप्त हुआ था। इस तरह आचार्य का जन्म व बौदि्ध दिवस एक ही दिन हुआ। इस बार आचार्य भिक्षु का 298वां जन्म व 266वां बौदि्ध दिवस है।
तेरापंथ भवन में चातुर्मास कर रही साध्वी प्रमोद ने बताया कि 1815 में राजनगर के श्रावकों ने संतों को वंदन करना बंद कर दिया। इस पर गुरु आज्ञा से मुनि भीखण ने राजनगर के लिए विहार किया। वहां जाकर मुनि भीखण ने बुदि्ध कौशल से श्रावकों को समझाया। उनसे वंदन व्यवहार करवा दिया, लेकिन स्वयं को संतोष नहीं हुआ। उसी दिन रात में मुनि भीखण को सर्दी लगकर बुखार आया। मुनि भीखण ने चिंतन किया, इस समय मेरा आयुष्य पूरा हो जाए तो मेरी क्या गति होगी। मैंने श्रावकों को झूठ ही समझाया। उन्होंने वापस श्रावकों से अगले दिन फिर बात करने का निर्णय किया और उनका बुखार ठीक हो गया। वह दिन आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी का था। इसके बाद आचार्य ने ग्रंथों व आगमों पर मंथन कर सार तत्व निकाले। उन सार तत्वों पर तेरापंथ की नींव रखी गई। जिन पर आज तेरापंथ धर्म संघ खड़ा है।
यह है सार तत्व
-धर्म त्याग में है, भोग में नहीं
-धर्म हृदय परिवर्तन में है, बल प्रयोग में नहीं
-लौकिक व लोकोत्तर दान-दया अलग-अलग है
आचार्य ने पाली में किया था चातुर्मास
पाली की धरा धन्य है कि उस पर आचार्य भिक्षु ने चातुर्मास किया था। उन्होंने उदयपुरिया बाजार की एक दुकान में चातुर्मास किया था। आचार्य ने बताया कि संसार व मोक्ष का मार्ग अलग-अलग है। इन दोनों को मिलाने से दोनों का महत्व समाप्त हो जाता है।
Published on:
01 Jul 2023 10:14 am
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