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अतिरिक्त मुख्य सचिव पाली में कपड़ा उद्यमियों से बोले : ‘मैं नहीं चाहता उद्योग बंद हो.., इसलिए तय समय में सुधार कर लें’

-कपड़ा उद्योग में प्रदूषण [ Pollution of textile industry ] पर अतिरिक्त मुख्य सचिव [ Additional Chief Secretary ] (उद्योग) सुबोध अग्रवाल [ Subodh Aggarwal ] ने सख्त हिदायत दी

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पाली

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Suresh Hemnani

Jan 04, 2020

अतिरिक्त मुख्य सचिव पाली में कपड़ा उद्यमियों से बोले : ‘मैं नहीं चाहता उद्योग बंद हो.., इसलिए तय समय में सुधार कर लें’

अतिरिक्त मुख्य सचिव पाली में कपड़ा उद्यमियों से बोले : ‘मैं नहीं चाहता उद्योग बंद हो.., इसलिए तय समय में सुधार कर लें’

पाली। कलक्ट्रेट सभागार में उद्यमियों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में प्रदूषण और दम तोड़ रहे पाली के उद्योग को फिर से ऊपर उठाने पर मंथन किया गया। इस बैठक में उद्यमियों ने एक्शन प्लान तो दिया, लेकिन अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) सुबोध अग्रवाल के किसी हालात में अनट्रीटेड पानी नदी में नहीं जाने का कहने और यह पानी डालने वालों के बारे में पूछने पर सीइटीपी पदाधिकारियों ने इसका ठिकरा उन ठेकेदारों पर फोड़ दिया, जो उनके कपड़ों की ब्लिचिंग और सिलिकेट वाशिंग करते हैं।

सीइटीपी अध्यक्ष अनिल गुलेच्छा का कहना था कि उद्यमी अपनी क्षमता से अधिक पानी का उपयोग फैक्ट्री में तो नहीं करते, लेकिन ब्लिचिंग या सिलिकेट वाशिंग जैसे प्रोसेस दूसरे ठेकेदारों से अवैध रूप से कराते हैं। वे प्रदूषित पानी कहां डालते है, इसकी उनको जानकारी नहीं है। ऐसे लोगों को भी वे नहीं जानते हैं। ये काम बिचौलियों के माध्यम से होता है। यह काम करने वालों को यह भी पता नहीं होता है कि कपड़ा किस फैक्ट्री या उद्यमी का है।

मैं नहीं चाहता उद्योग बंद हो
बैठक में एसीएस अग्रवाल ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि कोई उद्योग बंद हो। आप मुझे समयबद्ध कार्य करने का प्लान बनाकर दें। जिसे में एनजीटी में पेश कर सकूं। उन्होंने उद्यमियों से साफ कहा कि हर हाल में प्रदूषण को खत्म करना होगा। एनजीटी के आदेशों की पूर्ण पालना करनी होगी।

धुलाई करने वाले ठेकेदारों की मांगी सूची
एसीएस ने कपड़ा धुलाई का कार्य करने वाले ठेकेदारों की सूची मांगी। इस पर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के आरओ अमित शर्मा ने बताया कि उनके पास 76 ठेकेदारों की सूची है। इस बीच एक जने ने बताया कि ऐसे 300 से 400 ठेकेदार पाली, बालोतरा व जोधपुर में है। सीइटीपी के अधिकरियों से पूछने पर उन्होंने भी इसे सही माना।

रिवर्स बोरिंग पर पानी डालना आया सामने
बैठक में अधिकारी सिंह ने कहा कि यहां नदी व खेतों के साथ भूजल को भी खराब किया जा रहा है। उनको तीन ऐसे मामले ध्यान में है जिनमें रिवर्स बोरिंग की गई है। उन्होंने साफ कहा कि यह हत्या करने जैसा मामला है।

बोले, जोधपुर में हो रहा कार्य
पाली के उद्यमियों का कहना था कि कई उद्यमी जोधपुर व बालोतरा के साथ अहमदाबाद तक कपड़ा धुलाई के साथ अन्य कार्य करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जोधपुर के सालावास और भांडू में फिर से अवैध प्लांट शुरू हो गए है। पाली में नहीं है। इस पर एसीएस ने कहा कि इसका मतलब आपने प्रदूषण का भार जोधपुर स्थान्तरित कर दिया है।

एसीएस ने यह दिए निर्देश
-जेडएलडी करने के लिए समयबद्ध तरीके से प्लान दे। इसमें जो समय तय होगा उसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
-जो इकाइ जितना पानी उपयोग में लेती है और छोड़ती है उसी के अनुसार कन्सेंट तय होनी चाहिए।
-पानी का 100 प्रतिशत रियूज होना चाहिए।
-जो ठेकेदार अवैध रूप से पानी नदी मे डाल रहे हैं उनके खिलाफ कलक्टर व पुलिस मिलकर कार्रवाई करें
-अगले सप्ताह फिर एक दल आएगा, जो ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के नमूने लेगा और मशीनों की जांच करेगा। इसलिए इसमें सुधार करें।

यह बोले उद्यमी
-एक अप्रेल 2021 तक जेडएलडी का कार्य पूरा कर देंगे।
-31 मार्च 2020 तक सभी इन्फल्यूएंट को मानक पर ले आएगी।
-फेज एक व दो में उद्यमी नया प्लान चाहते हैं।

एनजीटी का ध्यान परिषद की तरफ करवा देंगे
नगर परिषद के आयुक्त आशुतोष आचार्य व आरयूआइडीपी के अधिकारियों से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की जानकारी ली और कहा कि ट्रीटमेंट प्लांट को जल्द क्षमता तक लेकर आए। ऐसा नहीं होने पर इस बार एनजीटी का ध्यान सीइटीपी से हटाकर आप कर करवा देंगे। इसके लिए आयुक्त को एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए।

एमवीआर प्लांट का किया अवलोकन
एसीएस सुबोध अग्रवाल ने कमलेश गुगलिया की इकाई में संचालित एमवीआर प्लांट का भी अवलोकन किया। गुगलिया ने प्लांट के संचालन और तकनीकी पहलुओं से एसीएस अग्रवाल को अगवत कराते हुए कंसेंट टू ऑपरेट शीघ्रता से जारी करने और अनुदान की राशि बढ़ाकर दो करोड़ करने की मांग रखी। अग्रवाल ने एवीआर तकनीक की सराहना करते हुए इसे अपनाने की उद्यमियों को सलाह दी।

एमवीआर तकनीक को बताया बेहतर
उन्होंने बताया कि एमवीआर तकनीक भी प्रदूषण मिटाने में उपयोगी साबित हो सकती है। मैंने इस तकनीक को देखा है। इस आधार पर कह सकता हूं कि यह तकनीक बेहतर है। बैठक में जिला कलक्टर दिनेशचन्द जैन ने निर्देशों की सख्ती से पालन करने की बात कही। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर वीरेन्द्रसिंह चौधरी, डॉ विजय सिंघल, एसके सिंह, राजेन्द्र शर्मा, सीइओ प्रहलाद सहाय नागा, प्रशिक्षु आइएएस देशलदान, उपखण्ड अधिकारी रोहिताश्वसिंह तोमर, दिनेश पुरोहित, सीइटीपी के अरुण जैन आदि मौजूद रहे।

मानक पर खरे नहीं उतरे सैम्पल
उन्होंने कहा कि पाली में जांच सैम्पल लगातार मानक पर खरे नहीं उतरे रहे हैं। सीइटीपी को तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह लेकर इसमें सुधार लाना होगा। स्काडा सिस्टम, फ्लो मीटर की व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। स्लज का निस्तारण भी समय पर करना होगा।

ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण
इससे पूर्व एसीएस ने मण्डिया रोड स्थित जल परिशोधन संयंत्रों का निरीक्षण किया। प्रदूषित पानी को उपचारित करने की व्यवस्था देखकर स्काडा मीटर की ऑनलाइन व्यवस्था के संबंध में निर्देश दिए।


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