
Agrasen Jayanti : महाराजा अग्रसेन ने दिया था समाजवाद का सिद्धांत
अग्रवाल समाज के आराध्य महाराजा अग्रसेन ने कृषि-व्यापार, उद्योग, गौ पालन के विकास के साथ नैतिक मूल्यों की स्थापना की थी। उन्होंने समाजवाद का सिद्धांत दिया। उनके राज्य के नगर में किसी भी अन्य जगह से आकर बसने वाले प्रत्येक परिवार को तत्कालीन प्रचलन का एक सिक्का व एक ईंट उस नगर के लोग देते थे। जिससे वह नगर में अपना घर बनाने के साथ व्यवसाय कर रोजगार प्राप्त कर सके। महाराज अग्रसेन ने राज्य को 18 गणों में विभाजित कर 18 गुरुओं के नाम पर 18 गौत्रों की स्थापना की थी। हर गौत्र अलग होने के बावजूद एक ही परिवार के अंग बने रहे। राज्य के उन्हीं 18 गणों से एक-एक प्रतिनिधि लेकर उन्होंने लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना की थी।
अग्रोदय गणराज्य की स्थापना
नए राज्य की स्थापना के लिए महाराज अग्रसेन ने रानी माधवी के साथ भारत का भ्रमण किया था। ॠषि मुनियों और ज्योतिषियों की सलाह पर राज्य का नाम अग्रेयगण या अग्रोदय रखा था। उनकी राजधानी अग्रोहा थी, जो आज के हरियाणा के हिसार के पास हैं। यह स्थान अग्रवाल समाज के लिए पूजनीय है।
महाभारत के युद्ध में हुए थे शामिल
अग्रवालों के कुलपिता महाराज अग्रसेन ने 16 वर्ष की आयु में महाभारत युद्ध में भाग लिया था। युद्ध में उनके पराक्रम के कारण ही भगवान कृष्ण ने उनको भारत के पुनरोत्थान का आशीर्वाद दिया था। अग्रवालों के आग्रेय गणराज्य व यौधेय गणसंघ ने विदेशी आक्रमणकारियों को हराया।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी रहे आगे
देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रवालों ने क्रांतिकारियों और भामाशाह दोनों ने भूमिका निभाई। रामदास गुड़वाला और लाला मटोलचंद अग्रवाल ने अपनी सम्पति क्रांतिकारियों के सहयोग के लिए दी। समाज के कई लोगों ने अपने प्राणों की भी आहुति दी।
Published on:
15 Oct 2023 12:26 pm
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