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बांगड़ अस्पताल शिशु रोग विशेषज्ञों को खींचतान कम करने प्रिंसिपल को करना हस्तक्षेप, सुलझा मामला

शिशु रोग विशेषज्ञों (Pediatrician) में खींचतान का मामला: मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने ली बैठक

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पाली। बांगड़ अस्पताल (Bangra Hospital) के शिशु रोग विशेषज्ञों (Pediatrician) के बीच चली आ रही खींचतान को खत्म करने आखिरकार बांगड़ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. केसी अग्रवाल को कदम उठाना पड़ा। उन्होंने शिशु रोग विशेषज्ञों की बैठक ली, जिसमें डॉ. आरके विश्नोई, डॉ. रफीक कुरेशी व डॉ. एसएन स्वर्णकार मौजूद रहे। बैठक में चैम्बर के बाहर डॉ. कुरैशी की नेम प्लेट लगाने तथा बेड व्यवस्था का भी निर्धारण किया गया।
बैठक में डॉ. कुरेशी ने दो वर्ष पूर्व चैम्बर से नेम प्लेट हटाने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि मरीज को लिखी दवाइयों में डॉ. विश्नोई हस्तक्षेप करते हैं। डॉ. विश्नोई को दो चैम्बर दे रखे है जबकि उनके चैम्बर के बाहर नेम प्लेट (Name plate) तक हटवा दी गई। उन्होंने चैम्बर में एसी नहीं लगे के कारण कमरा संख्या दस में बैठने की बा कही। वहीं डॉ. विश्नोई ने कहा कि वे शिशु रोग विभाग के एचओडी है। उनके निर्देश पर डॉ. कुरेशी व डॉ. स्वर्णकार गंभीरता नहीं बरतते। निर्धारित ओपीडी (OPD) छोड़ कर वे कमरा संख्या दस में बैठ गए, जिससे बच्चे व परिजन परेशान रहे। डॉ. स्वर्णकार ने भी डॉ. विश्नोई द्वारा उनकी ओर से मरीजों को दिए गए इलाज में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।

पत्रिका ने उठाया नौनिहालों का मुद्दा
शिशु रोग विशेषज्ञों की आपसी खींचतान से मरीजों को हो रही परेशानी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने 26 जुलाई के अंक में ‘शिशु रोग विशेषज्ञों की खींचतान नहीं हो रही कम, भुगत रहे नौनिहाल’ शीर्षक में समाचार प्रकाशित किया। इसमें खींचतान से नौनिहालों व परिजनों को हो रही परेशानी को उजागर किया था।

इन पर बनी सहमति (Agreement)
डॉ. रफीक कुरैशी (Dr. Rafiq Qureshi) के चेम्बर के बाहर नेम प्लेट लगेगी।
जिस दिन जिसकी ड्यूटी होगी, वह ही कॉल पर आएगा।
गर्मी व उमस ज्यादा होने पर चिकित्सक एसी लगे कमरा संख्या दस में बैठ सकते है।
शिशु रोग विशेषज्ञों के चैम्बर में भी जल्द एसी लगाने का आश्वासन।
डॉ, कुरेशी व डॉ. स्वर्णकार की यूनिट व डॉ. विश्नोई व डॉ. कपिल टांक की यूनिट द्वारा मरीजों को भर्ती करने को लेकर बेड व्यवस्था का भी निर्धारण।