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जानिएं इस गांव के बारे में जहां मुस्लिम करते है माता का सजदा तो हिन्दू निकालते है ताजियें…

- पादरली तुर्कान गांव में खिलते हैं सौहार्द के फूल  

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Padarali Turkan

गुंदोज.

क्षेत्र के पादरली तुर्कान गांव में लम्बी-चौड़ी कद-काठी के इकबाल खान को कोई एक बार देख ले तो शायद भूल नहीं पाए। भूले इसलिए नहीं क्योंकि यही वे इकबाल खान है, जो सालों से तेरिया माताजी मंदिर में नवरात्र का मेला भरवाते हैं। खान मेला भरवाने के दौरान ही मस्जिद में नमाज अता करते हैं तो मेले के दौरान माता के मंदिर में सजदां।

खान के प्रयासों ने तेरिया माताजी मंदिर को साम्प्रदायिक सौहाद्र्र का प्रतीक बना दिया है। इस मंदिर में हिन्दू-मुस्लिम सभी वर्गों के लोग सामूहिक रूप से माता व शिव की आराधना करते हैं। यहां बाकायदा मेला भरता है। इस मेले की पूरी कमान होती है मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष मुस्लिम समुदाय के इकबाल खान के हाथ। सिर्फ इकबाल ही नहीं, ये काम पीढि़यों से उन्हीं का परिवार करता चला आ रहा है। वे नवरात्र में रोजाना माताजी के दरबार में जाकर पूजा-अनुष्ठान करते हैं। गांव से आधा किलोमीटर दूर स्थित तेरिया माताजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद का जिम्मा इकबाल खान के पास हैं।

15 सदस्य मुस्लिम

साम्प्रदायिक सौहार्द का नजारा देखिए कि यहां की ट्रस्ट समिति में करीब 15 सदस्य मुस्लिम समुदाय के हैं। मेले का आयोजन हो या मेला प्रसादी का आयोजन, मुस्लिम परिवार के लोग बढ़-चढ़ कर बोलियां लगाते हैं। माताजी के दरबार में सभी धर्मों के लोग धार्मिक आस्था के वशीभूत पहुंचते हैं। माता मंदिर में उपासना के साथ इकबाल खान रोजे रखने के साथ मोहर्रम पर ताजिए भी निकालते हैं। इसमें गांव के हिंदू परिवार पूरे उत्साह के साथ शामिल होते हैं।

आराधना के साथ-साथ नमाज

मैं माताजी मंदिर ट्रस्ट का भी अध्यक्ष हूं। गांव में शिव के मंदिर का निर्माण मेरे परिवार वालों ने करवाया। मैं भगवान के मंदिर के अलावा मस्जिद में भी नमाज अता करता हूं। नवरात्र के कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मोहर्रम के ताजिए की तैयारी में लग जाएंगे।

-इकबाल खान, निवासी, पादरली तुर्कान