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यहां 17वीं अ​धिकमास पदयात्रा का उल्लास, स्वागत को सजा शहर, 150 भट्टियों पर प्रसादी की तैयारी

तीन दिन उमड़ेगा आस्था का ज्वार, मंदिर-मंदिर लगाएंगे धोक

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यहां 17वीं अ​धिकमास पदयात्रा का उल्लास, स्वागत को सजा शहर, 150 भट्टियों पर प्रसादी की तैयारी

यहां 17वीं अ​धिकमास पदयात्रा का उल्लास, स्वागत को सजा शहर, 150 भट्टियों पर प्रसादी की तैयारी

पाली में अधिकमास नगर परिक्रमा को लेकर शहर खासा उत्साहित है। स्वागत को लेकर संगठन तैयारी कर चुके हैं तो परिक्रमा को लेकर शहर को झंडों व फर्रियाें से सजाया गया है। इधर, पहले दिन 15 किलोमीटर की यात्रा कर श्रद्धालु मानपुरा भाकरी पहुंचेंगे। वहां पर शामियाने सजाए गए हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने की भी व्यवस्था की गई है। खास बात ये है कि अधिकमास नगर परिक्रमा में पिछले साल 100 भट्टियों पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाया गया था। इस बार रोजाना करीब 50 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था के लिए 150 भट्टियाें पर भोजन बनेगा। इसके साथ ही परिक्रमा में कार्यकर्ता भी साथ चलेंगे। इससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस बार पदयात्रा में पद यात्रियों के हाथों में भगवान के करीब 10 हजार ध्वज होंगे। यात्रियों को पहनाने के लिए 25 हजार दुपट्टे होंगे।

वर्ष 1976 में निकली थी पहली नगर परिक्रमा
आस्था के साथ सामाजिक एकता के इस महाकुंभ की शुरुआत वर्ष 1976 में हुई थी। उस समय से लेकर आज तक यह यात्रा अनवतर रूप से जारी है। कोरोना में जब सब कुछ थम गया था, तब जरूर यात्रा नहीं निकल पाई थी। इस बार यह धर्म व आस्था की सरिता उत्साह के साथ फिर बहेगी।

पहली बार पांच हजार श्रद्धालु हुए थे शामिल
पाली शहर में अधिकमास नगर परिक्रमा वर्ष 1976 में मुफतलाल बजाज, परसराम टवाणी, रामचन्द्र खेतावन, पं. राधाकृष्ण, नारायण दर्जी के साथ शहरवासियों ने निकाली थी। शहरवासी बद्रीप्रसाद अरोड़ा, शंकरलाल व्यास के सहयोग से निकाली गई वह पहली व एक दिन की यात्रा सोमनाथ मंदिर से राधा-कृष्ण बाग तक गई थी। इसमें पांच हजार श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था। आज यात्रा तीन दिन में 45 किमी से अधिक का सफर तय करती है। श्रद्धालुओं की संख्या रोजाना 50 हजार के पार होती है।

1982 के बाद यात्रा हुई तीन दिन की
अधिकमास की नगर परिक्रमा की शुरुआत के बाद हर साल इसमें श्रद्धालुओं की आस्था व संख्या बढ़ती चली गई। इस पर वर्ष 1982 के अधिकमास में यात्रा दो दिन की निकाली गई। इसके बाद से अब तक यात्रा तीन दिन की निकाली जाती है।

आज ये रहेगा यात्रा का मार्ग
सोमनाथ मंदिर से नगर परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु धौला चौतरा- झुंझार का मंदिर, भूतनाथ महादेव मंदिर, रामदेवजी का मंदिर होते हुए गुरुद्वारा सूरजपोल पहुंचेंगे, जहां से चीमाबाई संचेती स्कूल के पास प्रशासन पछाड महादेव मंदिर से दो टंकी के पास श्रीया देवी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर, सन्तोषी माता मंदिर, आदर्श नगर शीतला माता मंदिर होते रत्नेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। वहां से अम्बेडकर सर्किल होते हुए गांधी मूर्ति गीता भवन, रामद्वारा करणीमाता मंदिर, रामदेवजी का मंदिर, पवनपुत्र बालाजी मंदिर, बजरंग बाग, बांगड कॉलेज महादेवजी मंदिर, अटलेश्वर महादेव मंदिर नहर पुलिया, बापू नगर नीलकण्ठ महादेव मंदिर से हिन्दू सेवा मण्डल ताडकेश्वर रामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां से काला गोरा भैरूनाथ मंदिर, जडि़या कोठरी जडवेश्वर महादेव मंदिर जयनारायण व्यास सर्किल, वैद्य सेन समाज मंदिर, कुमावत समाज चारभुजा मंदिर, विवेकानन्द सर्कल, पुराना बस स्टैंड होते हुए रामदेव खटीक समाज मंदिर, पीपलीवाला बालाजी. बीएसएनएल ऑफिस के पीछे से होते हुए रामलीला मैदान, नन्देश्वर महादेव मंदिर नौपायतों की बगीची, गजानन्दजी मंदिर, मस्तान बाबा होते हुए चंडक मार्केट रामदेवजी मंदिर पहुंचेंगे, जहां से नया बस स्टैण्ड चामुण्डा माता मंदिर, गायत्री नगर गायत्री माता मंदिर, टैगोर नगर भूतेश्वर महादेव मंदिर, पाबूजी महाराज मंदिर देवासी समाज से होते हुए जबरेश्वर महादेव मंदिर मानपुरा भाकरी पहुंचेगी। यहां पर रात्रि विश्राम किया जाएगा।