
पाली. आज कई लोगों को वहम है कि उनको हृदय की बीमारी है। यह दर्द सर्वाइकल स्पोन्डिलाइटिस या सर्वाइकल प्रोलेप्स का हो सकता है। इसमें मरीज की गर्दन से लेकर हाथ, सीने व दाई तरफ ऊपरी कमर में होता है। इसी दर्द के कारण मरीज स्वयं को हृदय रोगी मान लेता है।
हमारी गर्दन में छह स्पाइनल जोड़ होते हैं। यह जोड़ मठाकाकार हड्डियां व उनके बीच कड़क मांस के तन्तु (डिस्क) से बनते है। हड्डियों के बीच केनाल जैसी संरचना होती है, जिससे तन्त्रिका तंत्र निकलता है। जब किसी कारण से पिचककर उस तंत्रिका तंत्र को दबा देती है तो सर्वाइकल पेन सिन्ड्रॉम होता है।
तीन स्तर है बीमारी के
इस बीमारी के तीन स्तर होते है। माइल्ड, मेडिरेट व सिवियर ये तीन स्तर है। इनमें दो स्तर कन्जरवेटिव या फिजियोथैरेपी से ठीक हो जाते हैं। जबकि सिवियर स्तर का उपचार सर्जिकल विधि से ही संभव है। इस बीमारी का स्तर एमआरआई जांच से ही पता लगाया जा सकता है।
फिजियोथैरेपी से होता अच्छा लाभ
फिजियोथैरेपी से इस बीमारी को पूरी तरह से भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए इलेक्ट्रोथैरेपी मशीनों का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही आइसोमैट्रिक व्यायाम से भी इस बीमारी में राहत मिलती है। इसके लिए फिजियोथैरेपी में मुख्य रूप से एसडब्ल्यूडी, सरवाइकल ट्रेक्शन व टीईएनएस मशीनों का उपयोग किया जाता है।
यह है इस दर्द के कारण
-अचानक अधिक वजन उठाने से
-गर्दन के बल पर कोई चोट लगने से
-गर्दन की हड्डियों में फ्रेक्चर होने से
-स्पाइनल चोट के कारण
-उम्र के लिहाज से शरीर में होने वाले बदलावों के कारण
आमसभा में की चर्चा
पिपलिया कला. कस्बे में 17 फरवरी को जैन समाज के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए गांव में आमसभा का आयोजन किया गया। समारोह को लेकर गांववासियों से समर्थन की अपील की गई। समारोह के लिए सभी को निमंत्रण दिया गया। ग्रामीणों ने महोत्सव में सहयोग देने की बात की। यह जानकारी महावीर राज जैन ने दी।
Published on:
05 Feb 2018 02:39 pm
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