
सांस्कृतिक विरासत: थाईलैंड में राम राज्य, जहां का राष्ट्रीय ग्रंथ है ‘रामायण’
Cultural Heritage: थाईलैंड में संवैधानिक रूप में राम राज्य है। यहां के वर्तमान चक्री राजवंश के सभी राजाओं को दुनिया में राजा राम के रूप में जाना जाता है। थाईलैंड में भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट ‘वजिरालोंगकोर्न’ का राज्य हैं, जिन्हें दसवां राम कहा जाता है। उनसे पूर्व नौ राजा हुए हैं, प्रथम राम से नवमें राम तक।
थाईलैंड की अयोध्या ‘अयुत्या’ नाम भारतीयों के बीच अच्छी तरह से जाना जाता है क्योंकि यह भारत के शहर अयोध्या से लिया गया है। यह ऐतिहासिक शहर बैंकॉक से लगभग 70 किलोमीटर दूर है और अपने अद्भुत भोजन, आरामदायक शहर के अनुभव और सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्राचीन खंडहरों के लिए जाना जाता है। 15वीं शताब्दी में ‘अयुत्या’ थाईलैंड की राजधानी बन गई। इस क्षेत्र में काफी संख्या में राम मंदिर है।
यहां राम राज्य
बौद्ध होने के बावजूद थाईलैंड के लोग अपने राजा को राम का वंशज होने से विष्णु का अवतार मानते हैं। इसलिए, थाईलैंड में एक तरह से राम राज्य है। वहां के राजा को भगवान श्रीराम का वंशज माना जाता है, थाईलैंड में संवैधानिक लोकतंत्र की स्थापना 1932 में हुई।
राष्ट्रीय ग्रंथ राम-कियेन
यद्यपि थाईलैंड में थेरावाद बौद्ध के लोग बहुसंख्यक हैं, फिर भी वहां का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है। जिसे थाई भाषा में ‘राम-कियेन’ कहते हैं। जिसका अर्थ राम-कीर्ति होता है जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित है। यहां राम कियेन पर आधारित नाटक का प्रदर्शन देखना धार्मिक कार्य माना जाता है। बैंकॉक के ग्रांड पैलेस में वाट फ्रा केव (एमराल्ड बुद्ध का मंदिर) के आसपास 178 दीवार पैनलों को भित्तिचित्रों से चित्रित किया गया है जो रामकियेन के दृश्यों को दर्शाते हैं।
सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर समुद्र मंथन के दृश्य
थाईलैंड की राजधानी के हवाई अड्डे का नाम ‘सुवर्ण भूमि’ है। यह आकार के अनुसार दुनिया का दूसरे नंबर का एयर पोर्ट है। इसके स्वागत हाल के अंदर समुद्र मंथन का दृश्य बना हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार देवों और असुरों ने अमृत निकालने के लिए समुद्र का मंथन किया था। यह दृश्य देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
थाईलैंड का राष्ट्रीय चिन्ह भगवान विष्णु का वाहन गरुड़
भारतीय पौराणिक ग्रंथों में गरुड़ को विष्णु का वाहन माना गया है। चूंकि राम विष्णु के अवतार हैं। बौद्ध होने पर भी हिन्दू धर्म पर अटूट आस्था रखते हैं। इसलिए उन्होंने गरुड़ को राष्ट्रीय चिन्ह घोषित किया है। यहां तक कि थाई संसद के सामने भी गरुड़ बना हुआ है। ये यहां जाने वाले भारतीयों को खासा आकर्षित करता है।
Published on:
05 Dec 2023 10:30 am
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