-राजीव दवे/सुरेश हेमनानी
पाली। पांच लाख जातरू मारवाड़ से रामदेवरा का सफर करते है। सफर में जुगाड़ के साधन और इसमें सवार ओवरलोड यात्री। नियमों को धत्ता बताकर चलते वाहन और उस पर यह ओवरलोड ट्रेफिक। रामदेवरा यात्रा के इन दिनों में खतरनाक सफर पर चल रहे है। दो बड़ी दुर्घटनाओं ने नौ जनों की जान ले ली है। पत्रिका ने शनिवार को इसकी पड़ताल की तो हाल में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। प्रशासनिक अमले और पुलिस ने कड़ाई का दावा तो किया लेकिन सच्चाई यह है कि यहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधों के लिए बड़ी कसरत की अभी भी दरकार है। जान को खतरा बनने वाले इस सफर जान लगाकर जुटना है।
घुमटी- कोई रोकने वाला नहीं
पाली-जोधपुर घुमटी के पास बने ब्रिज के पास पहुंचते ही जातरुओं का रैला नजर आया। वहां से बिना हेलमेट के दस से बारह मोटरसाइकिलों पर जातरू तेज गति से गुजरे। उनको रोकने या टोकने वाला कोई नहीं था।
टोल नाका- बेरोकटोक ओवरलोड
टोल नाके पर पहुंचे तो वहां से महज पंद्रह-बीस मिनट में 25 से अधिक ट्रैक्टर, लोडिंग वाहन और ऑटो गुजरे। इनमें क्षमता से अधिक जातरू बैठे थे। ट्रैक्टरों व लोडिंग वाहनों में जुगाड़ कर तीन-तीन स्तर बना दिए गए थे। उन सभी पर जातरू बैठे थे।
खारड़ा – बिना हेलमेट मोटरसाइकिल सवार
टोल नाके से आगे बढ़े तो एक बाइक पर आगे एक बच्चा, फिर चालक और उसके पीछे बच्चा व दो जने और बैठे थे। उस पर सामान भी लगा था। उसने भी हेलमेट नहीं पहना था। कई दुपहिया वाहन तो एमपी के थे, लेकिन उनको किसी ने पूरे रास्ते नहीं रोका।
पणिहारी बाइपास- हाइवे पर कोई बेरिकेडिंग नहीं
मार्ग के एक धामिज़्क स्थल से वापस पणिहारी बाइपास की तरफ आए तो मार्ग में लगे भंडारों के आगे लोग सड़क पर खड़े होकर जातरुओं को रोकते मिले। जातरुओं के लिए मागज़् पर किसी भी जगह बेरिकेडिंग या सफेद लाइन बनाई हुई नहीं मिली।
समय पर चेत जाते तो नहीं होते हादसे
– एक माह पूर्व हुई यातायात समिति बैठक में कोई चर्चा नहीं
– हाइवे पर कोई अस्थाई पुलिस चौकी, गश्त नहीं
– रात में हाइवे के थानों की पुलिस नहीं निकलती सुरक्षा के लिए
– परिवहन विभाग का वसूली पर ध्यान, जातरूओं की सुरक्षा की परवाह नहीं
– सिरोही, अजमेर, मेवाड़, राजसमंद के जिला प्रशासन के साथ मेले से पूवज़् बैठक कर कोई प्लान नहीं बनाया
-हाइवे से नहीं हटाए बेसहारा मवेशी
लापरवाही के यह जिम्मेदार
-जिला प्रशासन
-पुलिस विभाग
-परिवहन विभाग
– हाइवे टोल कम्पनियां