
पाली में खाखरे व दिवाली की सामग्री बनाती महिलाएं।
दिवाली या होली... कोई त्योहार जब भी आता था तो दादी-नानी घरों में ऐसी सामग्री बनाती थी। जो बीस-पच्चीस दिन तक नाश्ते में और भोजन के बाद मीठा खाने का मन करने पर उपयोग आती थी। यह सामग्री थी खाजा, साकळी, मठरी, खाखरा, फीणा आदि। जिसे अब दादी-नानी तो बहुत कम बनाती है, लेकिन व्यवसायी बना रहे हैं। घरों से ही इस सामग्री का व्यापार हो रहा है और देशभर में इनकी मांग है। अब तो विदेशों में रहने वाले लोग भी पाली आने पर यह सामग्री अपने साथ ले जाते हैं। इस घरेलू उद्योग से कई महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। वे अपने परिवार की आर्थिक शक्ति बन गई है। इसके साथ ही खिचिया का स्वाद भी लोगों को भा रहा है। जिसकी डिमांड होटलों व रेस्टोरेंट में भी है।
परम्परागत सामग्री का बदला स्वाद
घरों में बनने वाले खाजा, साकळी, डोठियां आदि के स्वाद को भी नया कर दिया गया है। कई लोग देसी घी में यह सामग्री बनवाते हैं तो कई व्यापारी विशेष मसालों का उपयोग कर रहे हैं। जिससे इनका स्वाद बढ़ गया है। शक्कर व गुड़ आदि मिलाकर भी इनके स्वाद को बढ़ाया गया है।
खाखरा का स्वाद निराला
पाली में बनने वाले खाखरों का स्वाद ही निराला है। यह आटे की पतली रोटी को सेककर तैयार किया जाता है। जिनको चाय व अचार आदि के साथ नाश्ते में उपयोग किया जाता था। अब बेसन के खाखरे, कोरमा के खाखरे, मोगर के खाखरे, टमाटर के खाखरे, पौदीना खाखरे व मसाला खाखरे आदि भी बनाए जा रहे है।
गूंजा में खोपरे के साथ मेवे
घरों में बनाए जाने वाले गूंजे में नारियल का बूरा डाला जाता था। अब उसमें मेवे डाले जाते है। कई लोग इसमे खजूर, अंजीर आदि डालकर भी बना रहे है। इसके साथ ही दिवाली पर मसाला सलोनी, मसाला काजू, स्पेशल खजूरा बनाए जा रहे है। इसके अलावा भी कई तरह की सामग्री तैयार की जा रही है।
काफी रहती है मांग
दिवाली पर घर में बनने वाली परम्परागत सामग्री की काफी मांग रहती है। खाखरे की मांग तो पूरे साल रहती है। दिवाली पर कई तरह के स्पेशल आइटम भी तैयार किए है।
दिनेश गादिया, विक्रेता व निर्माता
Published on:
14 Nov 2023 10:47 am
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