
Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी के साथ ऐसा भी होता है
देव शयनी एकादशी पर गुरुवार को देवता शयन करने चले जाएंगे। इसके साथ ही शहनाइयों की गूंज और मांगलिक कार्यक्रमों में सुनाई देनी वाली बैण्ड बाजों की मधुर धुन के स्वर मौन हो जाएंगे। जो बैण्ड वादकों, टेण्ट व्यवसायिय, हलवाई, कैटरिंग का कार्य करने वालों के साथ अन्य कई लोगों के लिए चक्रीय बेरोजगारी का काल होगा या ये कहे कि आर्थिक तंगी का समय। तंगी के इस काल में एक तरफ धर्म की गंगा बहती है तो दूसरी तरफ चक्रीय बेरोजगारी झेलने वाले इसे व्यवसाय को नया आयाम देने और परिवार के साथ समय बिताकर गुजारते हैं।
टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह राजपुरोहित बताते है कि देवशयनी एकादशी आने पर पाली जिले के करीब 100 से अधिक टेंट व्यवसायियों का कार्य चार माह के लिए बंद सा रहता है। ऐसे में वे साल के आठ माह तक काम आने वाली सामग्री की मरम्मत करने के साथ उसे नया रूप देने में जुटेंगे। जिससे जैसे ही देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो, वे बाजार में कुछ नया दे सके।
कार्मिक करते हैं अन्य व्यवसाय
विवाहोत्सवों आदि से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि देवशयनी एकादशी के बाद कार्यक्रम कम होने पर आठ माह तक कार्य करने वाले 80 प्रतिशत श्रमिक व कार्मिक गांवों में चले जाते है। वे इस काल में खेती करते है या भवन निर्माण के साथ फैक्ट्री आदि में कार्य करते हैं। जबकि 20 प्रतिशत को बचत से व्यवसायी तनख्वाह देते हैं।
धार्मिक आयोजनों से मिलता सहारा
बैण्ड व्यवसायी अजीज कोहीनूर के अनुसार देवशयनी एकादशी से देव उठनी एकादशी तक मांगलिक कार्यक्रम कम होते है। इस काल में भागवत कथा, चातुर्मास आदि के समय कुछ कार्यक्रम सम्बल देते हैं। बैण्ड वादन के लिए वैसे तो तीन-चार पार्टी होती है, लेकिन इस काल में केवल एक पार्टी रखते है। शेष लोग गांव चले जाते हैं।
Published on:
29 Jun 2023 10:13 am
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