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doctors day: ये जीवन रक्षक: मरीज को नहीं दिखते पर इन्हीं से होता बेहतर उपचार

डॉक्टर्स-डे विशेष

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पाली

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Rajeev Dave

Jul 01, 2023

doctors day: ये जीवन रक्षक: मरीज को नहीं दिखते पर इन्हीं से होता बेहतर उपचार

doctors day: ये जीवन रक्षक: मरीज को नहीं दिखते पर इन्हीं से होता बेहतर उपचार

चिकित्सक जब किसी गंभीर रोगी की जान बचाते हैं तो लोग उन्हें भगवान का दर्जा देेते हैं। वे मरीज व उनके परिजनों के सामने होते है। लेकिन ऐसे चिकित्सक भी हैं, जो नजर तो नहीं आते, लेकिन पर्दे के पीछे से जीवन रक्षक का कार्य करते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज की बीमारी और िस्थति का पता लगता है। जिसके आधार पर "मसीहा" यानी चिकित्सक दवा का चयन करते हैं और ऑपरेशन करते हैं। ऐसे ही कुछ चिकित्सकों से आज हम आपको रूबरू करवाते हैं, जो निश्चेतना विभाग, पैथोलॉजी, बायोकैमेस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विभागों में पर्दे के पीछे रहकर बीमारियों के साथ वायरस व बैक्टिरिया आदि की जांच करते हैं।
वायरस व बैक्टिरिया की करते जांच
माइक्रोबायोलॉजी लैब, जिसमें वायरस और बैक्टिरिया आदि की जांच की जाती है। टाइफाइड, मलेरिया या डेंगू जैसे रोगों का पता भी इसी लैब के चिकित्सक जांच कर बताते हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अरुणा सोलंकी बताती है कि कोविड के समय इसी लैब में 18-20 घंटे तक जांच कर रोगी के पॉजिटिव व नेगेटिव होने की जानकारी दी थी। वायरस जांच होने के कारण इसमें काफी सावधानी की जरूरत रहती है।
बीमारी की गंभीरता का चलता पता
बायोकेमेस्ट्री लैब में गुर्दे, लीवर, इलेक्ट्रोड, मधुमेह, कॉलेस्ट्रोल, थाइराइड सहित कई जांच की जाती है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गरिमा कहती है कि लैब में जांच करने के बाद मरीज की सही बीमारी का पता लगता है और उसी के आधार पर बेहतर उपचार होता है। हमारा ध्येय रोग व उसकी गंभीरता की बेहतर जांच करना है, जिससे मरीज को बेहतर डोज देकर जल्द ठीक किया जा सके।
रक्त की सभी जांच
पैथोलॉजी लैब, जिसमें रक्त की सभी तरह की जांच की जाती है। विभागाध्यक्ष डॉ. एचपी तोषनीवाल बताते है कि एनिमिया व युकिलिया (कैंसर) तक की जांच करते हैं। कई बार रोगी को कैंसर का अंदेशा होता है, लेकिन जांच में सामान्य गांठ निकलती है। ऐसा कई बार हुआ। जांच के बाद ही मरीज को कौनसी दवा देने पर अधिक राहत मिलेगी यह तय होता है। ऐसा ही सीनियर डेमोस्ट्रेटर डॉ. खेतमल का भी कहना है।
ऑपरेशन टेबल पर सबसे पहले
किसी का ऑपरेशन करना हो तो सर्जन या अन्य चिकित्सक करते हैं, लेकिन सबसे पहले काम होता है निश्चेतक का। जो मरीज की जांच कर उसे निश्चेतना की दवा देते हैं, उसके बाद ऑपरेशन प्रक्रिया शुरू होती है। प्रोफेसर डॉ. ओपी सुथार बताते हैं कि मरीज को सीपीआर देने व गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने का कार्य भी निश्चेतक ही करते हैं।