जिले में वर्ष 2014 व उसके बाद कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को कम नामांकन व अन्य कारणों से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक में मर्ज किया गया था। उन स्कूलों के भवन आज समाजकंटकों व मवेशियों की शरण स्थली बने हुए हैं। उन भवनों का उपयोग करने के लिए ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधि तैयार हैं। वे चाहते है कि इसके लिए शिक्षा विभाग या प्रशासन की इजाजत जरूरी है। वे आगे बढ़े तो इन भवनों की दशा सुधरने के साथ ग्रामीणों को भी सुविधा मिल सकती है।
शहरों में तो हुई जाग
ऐसा शहरों में तो हुआ भी है। पाली के जूनी कचहरी विद्यालय भवन में आज मानसिक विमंदितों के लिए केन्द्र का संचालन हो रहा है। सोजत के राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय बागेलाव की पाल में आबकारी विभाग चल रहा है, लेकिन 73 स्कूल आज भी वीरान है।
कई कायोZं के लिए हो सकता उपयोग
फूलनारायण आश्रम के पास वीरान पड़े सरकारी विद्यालय भवन को शिक्षा विभाग हस्तांतरित करें या किराए पर दे तो यहां पुलिस चौकी बन सकती है। बगीचा विकसित किया जा सकता है। आयुर्वेद अस्पताल, पटवार घर बन सकता है। इसके लिए उनको सरकारी प्रक्रिया पूर्ण कर भवन देने का मानस बनाना चाहिए।
मंजू जुगलकिशोर निकुंम, नगर पालिकाध्यक्ष, सोजत
खण्डहर हो रहा भवन
गढवाड़ा स्कूल का भवन खण्डहर हो रहा है। इसमे मवेशियों ने डेरा डाल रखा है। अब तो यह स्कूल भवन तक नहीं लगता है। यह भवन अभी शिक्षा विभाग के पास है। इसे ग्राम पंचायत को दिया जाए तो इसका पशु चिकित्सालय के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे ग्रामीणों को भी सुविधा मिलेगी।
प्रकाश परिहार, सरपंच, गढवाड़ा