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Rajasthan assembly elections 2023 : यहां जाजम पर होती थी चुनावी सभाएं, मतदाता पैदल या फिर बैलगाड़ी में वोट देने पहुंचते थे

पहले के चुनाव और आज के चुनाव में काफी अंतर आ चुका है। कहां तो जाजम पर सभाएं होती थी और मतदाताओं को भी पैदल या फिर बैलगाड़ी में वोट देने पहुंचना पड़ता था।

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Rajasthan assembly elections 2023 : यहां सभा में विरोध झेलने वाले पक्ष की अक्सर होती थी जीत

Rajasthan assembly elections 2023 : यहां सभा में विरोध झेलने वाले पक्ष की अक्सर होती थी जीत

पहले के चुनाव और आज के चुनाव में काफी अंतर आ चुका है। कहां तो जाजम पर सभाएं होती थी और मतदाताओं को भी पैदल या फिर बैलगाड़ी में वोट देने पहुंचना पड़ता था। तब तो विरोध झेलने वाला पक्ष अक्सर जीत जाता था। तकनीक के इस दौर में अपने पुराने अनुभव बताते हुए बाबरा निवासी सत्यनारायण वैष्णव ने बताया कि उस दौर का चुनावी प्रचार ज्यादा असरदार होता था। इसमें भी किसी पार्टी प्रत्याशी की सभा में किसी दूसरे पक्ष की ओर से सीधे तौर पर विरोध होता था। तब विरोध करने वाले पक्ष के प्रत्याशी की ही अक्सर हार होती थी। ऐसा इसलिए कि गांव में किसी भी पार्टी की सभा में सीधे रूप से विरोध करने वाले विरोधी पक्ष की छवि तत्काल रूप से ही जनता के सम्मुख खराब हो जाती थी।

सीएम शिवचरण माथुर ने भी की थी सभा
तत्कालीन पाली सांसद मूलचंद डागा के निधन के बाद 1988 में हुए उपचुनाव के दौरान प्रत्याशी शंकरलाल शर्मा के पक्ष में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने रात के समय बाबरा के गढ़ चौक में चुनावी सभा की थी। तब विपक्षी लोगों ने सभा में आवाज उठाई तो सम्बोधन करते हुए तत्कालीन सीएम माथुर ने लोगों को शांत किया।

प्रत्याशी को गांव से सुरक्षित ले जाया था
वैष्णव कहते हैं कि 70 के दशक में जैतारण से विधायक प्रत्याशी शंकरलाल ने जब रात में गांव के गढ़ चौक में चुनावी सभा की तो विपक्ष के लोगों ने विरोध किया था। विरोध को देखते हुए समर्थक उन्हें रात में गांव से चार किमी दूर बगतपुरा तक छोडऩे साथ गए थे। जिसके बाद मिले चुनावी परिणाम में प्रत्याशी शंकरलाल 50 हजार वोटों से विजयी हुए थे।