22 दिसंबर 2025,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गुरु व ग्रामीण मिले तो बदल गया गिरी का ‘गुरुकुल’

- गिरी के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन बना मिसाल - विद्यार्थियों को मिली रही निजी स्कूलों सरीखी सुविधाएं

2 min read
Google source verification

पाली. कहते है गुरु पत्थर को भी पारस बना देते हैं। यह बात गिरी के सरकारी स्कूल पर सटीक बैठती है। इस राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का परीक्षा परिणाम शिक्षकों के समर्पण से श्रेष्ठ रहना शुरू हुआ तो ग्रामीण व भामाशाहों ने भी इसकी तरफ कदम बढ़ा दिए। परिणाम आज

स्कूल का भवन किसी निजी स्कूल से कम नहीं है। यहां सुविधाएं एेसी हैं,

जिनको देखकर शहरी और बड़ी स्कूल के संचालक भी दांतों तले अंगुलियां दबा लेते हैं। अब तो स्कूल में विज्ञान संकाय शुरू करने की कवायद भी शुरू कर दी गई है।



भवन हो गया था जर्जर




गिरी गांव में स्कूल वर्ष 1948 में शुृरू हुआ था। लेकिन, विद्यालय का भवन

समय के साथ जर्जर हो गया। भवन की छत से बरसात में पानी टपकने लगा। इस पर तत्कालीन संस्था प्रधान दरियालाल विराचय ने शिक्षकों के साथ जयमल जैन हरक गुरु पाश्र्व पद्मोदय चेरिटेबल ट्रस्ट के महामंत्री प्रकाशचंद मेहता से भेंट की तो उन्होंने भवन निर्माण के लिए स्वीकृति दी। भवन नए स्थान पर बनाना तय हुआ है। इसके लिए गुमानसिंह की स्मृति में उनकी पत्नी गेंद कंवर परिवार, रतनलाल-शिवनारायण सोनी परिवार, सूरजमल-शांतिलाल सेन परिवार व भंवरी देवी परिवार के सदस्यों ने भूमि दान की।

विद्यालय में 20 कक्ष

इस विद्यालय भवन में 20 कक्ष बनाए गए, जिससे भविष्य में विद्यार्थियों की

संख्या 750 से अधिक होने पर भी कक्षों की कमी नहीं हो। हर कक्ष को

महापुरुषों के कथन लिखकर सजाया गया। कक्षों में महापुरुषों के चित्र भी

लगाए गए। हर कक्षा कक्ष के बाहर स्वच्छता का संदेश देने के लिए इस्टबिन लगाए गए। पानी पीने के लिए कैम्पर रखे गए हैं। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए गमलों में पौधे लगाने के साथ स्कूल परिसर में भी पौधरोपण किया गया है। इसके अलावा बच्चों के लिए हॉल व सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए मंच भी बनाया गया है। हर कक्षा कक्ष में पंखों व लाइट की सुविधा भी है।
राज्यपाल ने किया था सम्मानित
इस विद्यालय का माध्यमिक कक्षा परीक्षा परिणाम वर्ष 1996 में तत्कालीन

संस्थाप्रधान गोरधनलाल सुथार के समय 100 प्रतिशत रहा था। विद्यालय जिला स्तर पर पहले व मण्डल स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा था। इस पर राज्यपाल की ओर से विद्यालय को सम्मानित किया गया था। संस्था प्रधान नेमीचंद पंवार के समय उच्च माध्यमिक परीक्षा 2013 में विद्यालय जिला स्तर पर तीसरे व छठें स्थान पर रहा था। माध्यमिक परीक्षा 2015 में जिला स्तर पर विद्यालय तीसरे स्थान पर रहा था।



तैयार करवा रहे विज्ञान प्रयोगशाला



विद्यालय में अभी कला संकाय है। विज्ञान संकाय में अध्ययन करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को अन्य कस्बों व शहरों में पढऩे के लिए जाना पड़ता है। इस कारण यहां भामाशाहों के सहयोग से ही विज्ञान लैब का भी निर्माण करवाया गया है। जिसमें बच्चों के प्रयोग करने के लिए उपकरण भी लगाए जा रहे हैं।



दिनेश कुमार, प्रधानाचार्य, गिरी स्कूल

...............




यूं हुआ क्रमोन्नत

प्राथमिक विद्यालय - वर्ष 1948
उच्च प्राथमिक - वर्ष 1964
माध्यमिक विद्यालय - वर्ष 1978
उच्च माध्यमिक विद्यालय - वर्ष 2007

ये भी पढ़ें

image