
unique initiative: दुदिया गांव में गोबर एकत्रित करते पालीवाल।
unique initiative: गांव का नाम जहन में आते ही ऐसा दृश्य सामने आता है, जहां सड़कों पर विचरते मवेशी और जगह-जगह गोबर आरती गिरा हो। उस गोबर का कोई उपयोग भी नहीं होता है। पाली में एक ऐसा गांव है जहां गोबर से आस्था की ज्योत जग रही है। गांव का चौक भी साफ रहता है। इस दुदिया गांव में करीब 250 मवेशी है। उनका गोबर उठाने के लिए ग्रामीण अपने स्तर पर बोली लगवाते हैं। जो गांव का कोई व्यक्ति लेता है। इस बोली से आने वाली राशि पक्षियों को चुग्गा डालने, मवेशियों के लिए घास आदि लाने या गांव के मंदिर आदि में छोटे-मोटे धार्मिक कार्यक्रम करवाने में उपयोग लिया जाता है। जो व्यक्ति ठेका लेता है वह गांव में सड़कों और मुख्य रूप से चौक से गोबर एकत्रित करता हैं। जिसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है। गोबर अधिक होने पर वह उसे बेचता भी है। जिससे उसकी आय भी होती है।
एक साल के लिए देते हैं कार्य
गांव में गोबर उठाने का कार्य एक साल के लिए दिया जाता है। यह कार्य कर रहे रामेश्वलाल पालीवाल व उसकी पत्नी आसी देवी बताते हैं कि गांव में सहमति से यह कार्य दिया जाता है। हमने इस बार पांच हजार रुपए में ठेका लिया है। हम पति-पत्नी रोजाना सुबह गांव के चौक में आकर गोबर एकत्रित करते हैं। रोजाना करीब 20-25 तगारी गोबर एकत्रित कर चौक में ही अलग-अलग जगह एकत्रित करते हैं। यह खाद के रूप में खेतों उपयोग हो जाता है। गोबर की खाद अधिक होने पर ग्रामीण भी ले जाते हैं।
आखरिया में आते हैं सभी मवेशी
गांव के सभी मवेशी सुबह आखरिया चौक में आ जाते हैं। वे लगभग पूरे दिन उसी जगह विचरते हैं। ऐसे में गांव में भी मवेशियों का भ्रमण कम रहता है। इससे गांव भी स्वच्छ रहता है और एक ही जगह से गोबर भी एकत्रित आसानी से हो जाता है।
Published on:
20 Oct 2023 11:27 am
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