
VIDEO : ये अस्पताल है! यहां इंसान दिखने चाहिए, मवेशी या कुत्ते नहीं, पढ़ें पूरी खबर...
पाली। बांगड़ अस्पताल [ bangar hospital ] की व्यवस्थाओं का जायजा लेने गुरुवार को पहुंची दो सदस्यीय टीम ने खासी नाराजगी जताई। बांगड़ अस्पताल के अंदर कुत्तों तथा मोर्चरी के बाहर मवेशी को देखा तो परिवार कल्याण संस्थान [ Parivar Kalyan Sansthan ] (सिफू) जयपुर की सीनियर रिसर्च ऑफिसर रिचा छाबड़ा [ Richa Chhabra ] भडक़ गई। उन्होंने कहा कि ये अस्पताल इंसानों के लिए है। यहां इंसान नजर आने चाहिए, कुत्ते और मवेशी नहीं। ये अस्पताल में किसी को नुकसान भी पहुंचा सकते है। उनकी फटकार के बाद गार्ड ने मवेशी को बाहर निकाला।
दरअसल, कायाकल्प को लेकर चलाए जा रहे क्वालिटी एश्योरेंस के एक्सटर्नल एसेसमेंट को लेकर दो सदस्यीय राज्य स्तरीय दल गुरुवार को पाली पहुंचा। दल में शामिल राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (सिफू) जयपुर की सीनियर रिसर्च ऑफिसर रिचा छाबड़ा एवं चिकित्सा विभाग निदेशालय जयपुर की पीएमएसएमए की कार्यक्रम अधिकारी नलिनी खत्री ने बांगड़ अस्पताल के कायाकल्प कार्यक्रम के नोडल प्रभारी डॉ. राजेन्द्रपाल अरोड़ा के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया।
वार्डों के निरीक्षण के दौरान कई वार्डों में पंखों पर धूल जमी देख उसकी सफाई करवाने के निर्देश दिए। इएनटी वार्ड में मैली चद्दरें देख नाराजगी जताई। उसके बाद उन्होंने आइसीयू वार्ड व ऑपरेशन थियेटर का भी निरीक्षण किया। जहां कमियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त करवाने की बात कही। इसके बाद वे रसोईघर में पहुंची। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी ली कि मरीजों को दिन में कितनी बार भोजन व नाश्ता दिया जाता है।
मोर्चरी के जाने हालात
उसके बाद उन्होंने अस्पताल की मोर्चरी खुलवाकर निरीक्षण किया। पोस्टमार्टम में काम आने वाले औजारों की स्थिति देखी। बाद में पीएमओ कक्ष में पीएमओ डॉ. ए.डी. राव से बांगड़ अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उनसे चर्चा की। इस दौरान नर्सिंग अधीक्षक ओमप्रकाश गर्ग, मेलनर्स प्रथम जेठूसिंह उदावत, राजेन्द्रसिंह उदावत, जिला आईईसी समन्वयक नंदलाल शर्मा भी उपस्थित रहे। टीम शुक्रवार को भी बांगड़ अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेगी। उसके बाद रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय सौंपेगी।
सुरक्षा गार्ड को चेताया
मोर्चरी के बाहर मवेशी को बैठा देख सीनियर रिसर्च ऑफिसर रिचा छाबड़ा ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मवेशी अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को नुकसान पहुंचा सकते है। उनकी हिदायत के बाद गार्ड ने मवेशियों व श्वानों को भगाया। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी ली। ये भी जाना कि कितने गार्ड ड्यूटी पर रहते है तथा उनके ड्यूटी पाइंट किया है। उन्होंने कहा कि आगे से सुरक्षा में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
बायोवेस्ट निस्तारण की प्रक्रिया में सुधार के निर्देश
मोर्चरी के पीछे की तरफ बने बायोवेस्ट निस्तारण के स्थान का भी टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निस्तारण कक्ष के बाहर ही बायोवेस्ट पड़े होने पर नाराजगी जताई। इसमें सुधार के निर्देश दिए।
ग्रेडिंग के बाद मिलेगी प्रोत्साहन राशि, पहले भी मिल चुका है पुरस्कार
योजना के तहत चिकित्सा संसाधनों का तीन चरणों में निरीक्षण करने का प्रावधान है। प्रथम चरण में स्थानीय अधिकारी खुद ही अपनी ग्रेडिंग तय करते हैं। इसके बाद अन्य संस्थान से अधिकारियों की टीम निरीक्षण करती है। 70 फीसदी से अधिक अंक होने पर वापस अन्य संस्थान से आने वाली टीम अंतिम निरीक्षण करती है। इसके बाद मिलने वाली गे्रडिंग को ही पुरस्कार के लिए आधार माना जाता है। बांगड़ अस्पताल को वर्ष 2017-18 में द्वितीय पुरस्कार के तहत प्रोत्साहन स्वरूप 20 लाख रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। इसमें मिलने वाली राशि अस्पताल विकास पर खर्च की जाती है।
Published on:
13 Dec 2019 11:30 am
