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मंडी बंद : मेहंदी का रंग पड़ रहा फीका, नहीं मिल रहे खरीददार

- मेहंदी पत्तों के नहीं मिल रहे खरीददार

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पाली

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Suresh Hemnani

May 31, 2021

मंडी बंद : मेहंदी का रंग पड़ रहा फीका, नहीं मिल रहे खरीददार

मंडी बंद : मेहंदी का रंग पड़ रहा फीका, नहीं मिल रहे खरीददार

पाली/बगड़ी नगर। पाली जिले के सोजत की मेहंदी अपनी रंगत और खुशबू के लिए पहचानी जाती है। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण आठ माह के लॉकडाउन से आर्थिक दुष्प्रभावों का सामना कर रहे थे कि नए कोरोना वायरस ने वापस लॉकडाउन लगवा दिया। इसके कारण सोजत की मंडी में मेहंदी फसल की खरीद बिक्री बंद हो गई। मायूस किसान अपनी मेहंदी की फसल को घरों में ही रखने को मजबूर है। इस दौहरी मार से किसान बर्बादी के कगार पर खड़ा है।

सोजत क्षेत्र के हजारों किसानों की मेहंदी की फसल इस साल नहीं बिकी है। उपज नहीं बिक पाने से ये हजारों किसान आर्थिक अनिश्चितता के शिकार हैं। मेहंदी फसल की कटाई के दौरान मजदूरी बहुत महंगी होने के कारण लागत भी भारी आती है। जिसके कारण किसान की जेब का आखिरी पैसा भी फसल समेटने में खर्च हो जाता है। अब जबकि खरीफ की बुवाई सीजन शुरू होने में एक महिने से भी कम समय बचा है, तो किसानों के पास नकदी की भारी कमी है।

अनिश्चितता का साया
मेहंदी की उपज तैयार करने वाले किसान इस वक्त भारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उनके भविष्य पर अनिश्चितता का काला साया मंडरा रहा है। ये मुश्किल दौर जारी रहता है, तो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही ग्रामींण अर्थव्यवस्था का संकट और बढ़ सकता है। मंडी व बाजार में अनिश्चितता के माहौल की वजह से निजी खरीददार भी मेहंदी की उपज खरीदने से बच रहे हैं। वो बड़े पैमाने पर किसानों की फसल खरीद पाने की हालत में नहीं हैं।

घाटे का सौदा
किसान मगाराम सीरवी ने बताया कि हमारे आसपास के गांवों मे कई लोगों के पास भारी तादाद में मेहंदी की उपज बिक्री से बची हुई है। खुशकिस्मती से अनेक किसानों ने फरवरी महिने के आखिर में तीन हजार रुपए प्रति मण के भाव से बेच ली थी। हालांकि उनका ये सौदा घाटे का था, लेकिन अब भाव और खरीददार दोनों ही नहीं मिलने से मायूस किसान की स्थिती खराब हो गई है। फसल समेटने में जो मजदूर लगे थे उनकी मजदूरी भी चुकानी है तथा मानसून के आने में बहुत कम समय बचा है। खरीफ की फसल बुवाई के लिए भी नकदी चाहिए। ऐसे में मानसून की नमी भरी हवा से मेहंदी पत्ता की फसल काली पडऩे के डर से किसान अपनी उपज औने पौने दाम में बेचने को विवश है।

इनका कहना है...
मेहंदी की फसल तैयार करने में लागत बहुत अधिक आती है और हमें वाजिब भाव नहीं मिलते हैं। इस लॉकडाउन ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। अब मंडी बंद होने से कोई व्यापारी फसल खरीदने नहीं आ रहे हैं। खरीफ की बुवाई के लिए भी पैसा चाहिए। -बाबूलाल घांची, किसान, बगड़ी नगर

मानसून आने वाला है और बारिश की नमी से मेहंदी का पत्ता रंग बदलकर काला पड़ जाता है। इसके कारण भाव नहीं मिलते। एक बारिश होने के बाद इस फसल के दाम आधे रह जाते हैं। दो बार हल्की बारिश से भारी तादाद में नई फसल तैयार हो जाती है। अब तो यह घाटे का सौदा है। -नानकराम सीरवी नवादियां, किसान, बगड़ी नगर