
Preamble of the Indian Constitution: हर स्कूल में लिखा होगा, हम भारत के लोग...
भारतीय संविधान की उद्देशिका जनता के लिए हैं तथा जनता ही अंतिम सम्प्रभु है। यह बात प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे और वहां आने वाले लोग पढ़ व समझ सकेंगे। हर स्कूल में इसके लिए उद्देशिका पट्ट लगाया जाएगा। इसके साथ ही भारत में रहने वाले नागरिक के क्या मौलिक कर्तव्य है, यह भी स्कूल परिसर में लिखवाए जाएंगे। हर शनिवार नो बैग डे पर प्रार्थना सभा में उद्देशिका और मौलिक कर्तव्यों का पठन करवाया जाएगा। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य समारोह के साथ स्कूलों में इन दोनों का वाचन करवाया जाएगा।
विद्यार्थियाें को होगा कर्तव्य बोध
संविधान की उद्देशिका व मौलिक कर्तव्य विद्यालय में अंकित किए जाएंगे। इससे संविधान की जानकारी के साथ विद्यार्थियों को कर्तव्याें का बोध होगा और वे श्रेष्ठ नागरिक बनेंगे।
पालाराम मेवाता, संयुक्त निदेशक, शिक्षा मण्डल, पाली
यह है संविधान की उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित कराने वाली, बन्धुता बढ़ाने के लिए, दृढ़ संकल्पित होकर अपनी संविधान सभा में आज तारीख २6 नवम्बर 1949 ई॰ (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। यह उद्देशिका हर स्कूल में
यह है हमारे मौलिक कर्तव्य
हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें व उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें तथा पालन करें।
भारत की प्रभुता एकता, और अखंडता की रक्षा करें तथा उसे अक्षुण्ण रखें।
अपने राष्ट्र की रक्षा करें।
देश के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें।
भारत की सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उनका परिरक्षण करें।
प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें और उसका संवर्धन करें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करें।
सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें।
व्यक्तिगत एवं सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें।
माता-पिता या संरक्षक है, तो 6 से 14 वर्ष के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करें।
Published on:
17 Jul 2023 10:22 am
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