
Watch Video : अनदेखी का शिकार यहां का ग्रेनाइट उद्योग...अब नई सरकार से चाहिए 'गारंटी' !
-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली के दो सौ करोड़ के ग्रेनाइट पत्थर उद्योग को नई सरकार से गारंटी की दरकार है। पाली का ग्रेनाइट दुनिया के कई देशों में निर्यात होता है और देश के विभिन्न राज्यों में भी इसकी डिमांड है। लेकिन घर में ही अनदेखी का शिकार है। हालात यह है कि तीन दशक पूर्व स्थापित ग्रेनाइट उद्योग की बुनियादी जरूरतें भी सरकार और रीको उपलब्ध नहीं करवा पाए। इस कारण आधी इकाइयां बंद हो गई और आधी चल रही है। यह उद्योग इस उम्मीद पर जिंदा है कि कभी तो दिन फिरेंगे और सरकार सुध लेगी। अब नई सरकार यदि संबल दे तो जालोर के बाद पाली ग्रेनाइट का नया हब बन सकता है। क्योंकि यहां ग्रेनाइट पत्थर के अथाह भंडार है और पाली से अन्य स्थानों की कनेक्टिविटी भी बेहतर है। रेलवे का डीएमआईसी कॉरिडोर इस उद्योग के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकता है।
पाली के आसपास 500 खदानें, सर्वाधिक बिकने वाला ग्रेनाइट भी यहीं
पाली में ग्रेनाइट उद्योग के विकास की असीम संभावनाएं हैं। यहां आसपास ग्रेनाइट की करीब 500 खदानें है। खारड़ा, जवडि़या, साकदड़ा, कूरणा, डेंडा, बाला समेत कई गांवों की खदानों में प्रचुर मात्रा में खनन हो रहा है। यहां का पत्थर पाली व जालोर की इकाइयों में पहुंचता है। कटिंग और फिनिशिंग के बाद विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जा रहा। हैदराबाद एयरपोर्ट समेत कई बड़ी परियोजनाओं में भी पाली का ग्रेनाइट उपयोग किया गया है। यहां कई तरह की गुणवत्ता का पत्थर उपलब्ध है। देश में सर्वाधिक बिकने वाला ग्रेनाइट पत्थर का खनन भी पाली के आसपास की खदानों में हो रहा है।
इसलिए है उपेक्षित
-ग्रेनाइट उद्योग औद्योगिक क्षेत्र चतुर्थ फेस में स्थापित है, यहां भारी वाहनों के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है।
-डंपिंग यार्ड नहीं है। स्लरी खुले में पड़ी रहती है।
-डंपिंग के लिए उपलब्ध कराई गई जमीन पर अतिक्रमण है।
-ग्रेनाइट उद्योग की सड़कें क्षतिग्रस्त है। अंग्रेजी बबूल की भरमार है।
-चारों तरफ स्लरी बिखरी है। कहीं कचरा पड़ा है तो कहीं मृत जानवर।
-सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, आए दिन चोरी की वारदातें हो रही।
-रीको बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करवा पाया।
-बैंक आसपास नहीं, आपराधिक गतिविधियों की आशंका रहती है।
-अनुकूल माहौल के अभाव में नए उद्यमी रुचि नहीं दिखा रहे।
सरकार से ये दरकार
-ग्रेनाइट उद्योग के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना।
-रिंग रोड के जरिए ग्रेनाइट उद्योग को हाइवे से जोड़ना।
-सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना।
-पुलिस गश्त अथवा पुलिस चौकी स्थापित करना।
-बैंक और रीको कार्यालय स्थापित करना।
-सड़कें और सफाई व्यवस्था सुचारू करना।
-नए-पुराने उद्यमियों को प्रोत्साहित करना।
-डंपिंग यार्ड की सुविधा मुहैया करवाना।
-इकाइयों के लिए सब्सिडी और बिजली की दरों में रियायत देना।
-उद्यमियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना।
एक्सपर्ट व्यू
-पाली में ग्रेनाइट उद्योग की संभावनाएं बहुत है। हम केवल कपड़ा उद्योग पर निर्भर है। जबकि, ग्रेनाइट यहां का दूसरा बड़ा उद्योग हो सकता है। लेकिन, न कनेक्टिविटी है और न ही अन्य संसाधन। आवश्यक सुविधाओं के लिए भी उद्यमी सालों से तरस रहे हैं। ऐसे में कोई क्यों यहां निवेश करेगा। इस उद्योग को प्रोत्साहित करने की पहल नई सरकार को करनी चाहिए।
-महेन्द्र तातेड़, उपाध्यक्ष वेस्टर्न जोन ग्रेनाइट एसोसिएशन, पाली
-पाली का ग्रेनाइट उद्योग कई मुश्किलों से गुजर रहा हैं। इसके समाधान के लिए नई सरकार को पहल करनी चाहिए। उद्यमियों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक नए उद्यमी रुचि नहीं दिखाएंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए रिंग रोड का प्रोजेक्ट जल्द बनाना चाहिए। ग्रेनाइट उद्यमियों को सरकार प्रोत्साहित करें, ताकि यहां इकाइयां ज्यादा से ज्यादा स्थापित हो।
-राणमाल भंसाली, ग्रेनाइट उद्यमी, पाली
Updated on:
11 Dec 2023 11:35 am
Published on:
11 Dec 2023 11:34 am
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