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रोजगार के लिए बाहर नहीं जाए कोई व्यक्ति, इसीलिए 55 साल पहले गांव में लगाया उद्योग

- प्रवासियों के लिए प्रेरणादायी- पिपलिया की पीजी फॉइल्स में 99 फीसदी श्रमिक स्थानीय

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रोजगार के लिए बाहर नहीं जाए कोई व्यक्ति, इसीलिए 55 साल पहले गांव में लगाया उद्योग

रोजगार के लिए बाहर नहीं जाए कोई व्यक्ति, इसीलिए 55 साल पहले गांव में लगाया उद्योग

-राजेन्द्रसिंह देणोक/श्याम शर्मा
पाली। पाली-जयपुर राजमार्ग स्थित पिपलिया गांव का पीजी फॉइल्स उद्योग उन समूचे प्रवासियों के लिए प्रेरणादायी बन सकता है जो भविष्य में यहां व्यापार-रोजगार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। 55 साल पूर्व मारवाड़ के अभावग्रस्त इलाके में इस उद्योग की नींव सिर्फ इसलिए दी गई कि गांव के किसी ग्रामीण को रोजगार के लिए बाहर भटकना न पड़े। वर्तमान में यहां 99 फीसदी श्रमिक और अन्य कार्मिक स्थानीय है। यही नहीं, यहां का उत्पाद देश ही नहीं विदेशों तक निर्यात किया जा रहा है।

ग्रामीणों को किया प्रशिक्षित
पिपलिया गांव के पारसराज शाह को गांव से बेहद लगाव था। उनका सपना था कि गांव के किसी भी व्यक्ति को रोजगार के लिए अन्यत्र न जाना पड़े। इसलिए उन्होंने 1965 में केबल बनाने की इंडस्ट्री गांव में ही लगाई। बाहर के तकनीकी सुपरवाइजर को नौकरी पर रखा और स्थानीय ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया। देखते ही देखते समूचा स्टाफ सभी कार्यों में दक्ष हो गया। 1982 में पीजी फॉइल्स की नींव रखी गई। वर्तमान में यहां 700 श्रमिक कार्यरत है। श्रमिक ही नहीं, मैनेजर और सुपरवाइजर भी स्थानीय है।

मिथक तोड़ा, 260 करोड़ का सालाना टर्न ओवर
उद्योग का संचालन केवल शहरों से ही किया जा सकता है, यह मिथक शाह ने 55 साल पहले ही तोड़ दिया था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने केबल बनाने की इंडस्ट्री गांव में लगाई और उसका सफल संचालन किया। 1982 में उनका देहांत हो गया। पुत्र पंकज पी शाह ने कारोबार को आगे बढ़ाते हुए पीजी फॉइल्स नाम की एक और इकाई स्थापित की तथा एल्युमिनियम फॉइल्स (दवाइयों के रैपर) बनाने का काम शुरू किया। इसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जेलसिंह के हाथों कराया गया था। दोनों इकाइयों का सालाना टर्न ओवर 260 करोड़ रुपए हैं। वे ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नानेश पीजी मेमोरियल नाम से अस्पताल भी संचालित कर रहे हैं।

ऐसा सम्मान कहीं नहीं मिल सकता
पिता का सपना था कि गांव के लोग रोजगार के लिए बाहर नहीं जाएं। इसी सपने को पूरा कर रहे हैं। गांव को लोग बहुत सम्मान देते हैं। इतना सम्मान और कहीं नहीं मिल सकता। इसी में हमारी खुशी है। -पंकज पी शाह, सीएमडी, पीजी फॉइल्स लि. पिपलिया कला