
Farming: दिव्यांग किसान के इस कार्य से स्प्रे करना हो गया आसान
जहां चाह वहां राह... यह कहावत बताती है कि यदि कोई कुछ हासिल करना चाहता है, तो वह सफल होने का मार्ग खोज ही लेता है। इसे साकार किया है ढाबर गांव के किसान ने, जो दिव्यांग है और खेत में दवा का छिड़काव करने में परेशानी का सामना करना था। इस पर उसने अपने तरीके से ऐसा यंत्र तैयार कर लिया, जिससे पाउडर को हाथ लगाए बिना ही महज दो घंटे में करीब 200 बीघा भूमि पर ट्रैक्टर की सहायता से छिड़काव किया जा सकता है।
ढाबर के किसान शंकरलाल बोराणा पुत्र थानाराम वर्ष 1991 से खेती कर रहे है। खेतों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करते समय कुछ साल पहले क्षेत्र के कुछ किसानों की तबीयत बिगड़ी। इनको खुद को भी हाथ से दवा का स्प्रे करने में परेशानी होती थी। इस पर उन्होंने लोहे की चद्दर, लोहे के 200 लीटर के ड्रम, एंगल आदि से एक स्प्रे यंत्र बनाया। इस यंत्र में एक पंखा लगा है और ऊपर की तरफ से ट्रैक्टर के पीछे बैठा एक व्यक्ति ड्रम में किए छेद से पाउडर उसमें डालता है। जो पंखों की सहायता से तेजी से उड़ता है और खेत में ड्रम के एक हिस्से से फसलों पर स्प्रे की तरफ फैल जाता है।
कल्टीवेटर में 49 हल
खेत में हल जोतने के लिए बोराणा के पास 13 फीट वाला एक कल्टीवेटर था। इससे खेत में बार-बार ट्रैक्टर घुमाना पड़ता था। उससे खरपतवार भी साफ नहीं होती थी। बोराणा बताते है कि इसे मैंने अपने एक लोहे का कार्य करने वाले मित्र की सहायता से नया रूप दिया। कल्टीवेटर को 20 फीट चौड़ा कर उसमें हल की संख्या 49 कर दी। यह जगह अधिक घेरता था। इस कारण इसमें फोल्ड करने का सिस्टम तैयार करवाया। इसमें खरपतवार हटाने के लिए उपयोग में आने वाली दवा डालने की व्यवस्था की। इससे खेत में हल जोतते समय ही खरपतवार समाप्त हो जाती है और दोहरी मेहनत व समय नहीं लगता।
700-800 मीटर की लम्बाई में फैलता स्प्रे
बकौल बोराणा, कीटनाशक छिड़काव के इस यंत्र से करीब 700-800 मीटर की लम्बाई में स्प्रे हो जाता है। जब यंत्र का उपयोग नहीं होता है तो पंखा खोलकर अन्य कार्य में उपयोग लिया जा सकता है। यह यंत्र बनाने पर उनके करीब 32 हजार रुपए खर्च हुए। वे बताते है कि अब यह यंत्र गांव के कुछ अन्य गांव के किसान भी बनाना चाहते हैं।
Published on:
06 Oct 2023 10:10 am
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