
International Womens Day 2024: प्रशासन...राजनीति...व्यापार...सब कुछ नारीशक्ति से ही संभव
International Womens Day 2024 प्रशासन हो या राजनीति अथवा व्यापार अब सब जगह महिलाएं अपने हुनर का लोहा मनवा रही है। खासतौर से ऐसे कार्य जहां आमतौर पर महिलाओं का प्रवेश नहीं था, वहां भी महिलाएं अपनी काबिलियित से दाखिल हो रही है। अब तो चाहे घर का प्रबंधन हो या प्रशासन या राजनीतिक फैसले, महिलाओं के बिना अधूरे हैं। महिलाएं केवल घर का प्रबंधन ही नहीं, आर्थिक रूप से सशक्त बन रही है। पुलिस और प्रशासन में महिलाओं का दबदबा भी सुखद तस्वीर कही जा सकती है।
पाली संभाग की कमान संभाल रही प्रतिभासिंह
प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से जिलाें में संभागीय आयुक्त का पद सबसे बड़ा होता है। पाली संभाग को यह सौभाग्य मिला है कि यहां लगातार दूसरी संभागीय आयुक्त नारी शक्ति है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी डॉ प्रतिभासिंह के हाथों में पाली संभाग की कमान है। सिंह का कहना है कि महिलाएं अपनी आंतरिक शक्ति को अवश्य पहचाने और अपने पसंद का काम मेहनत और लगन से करें। कोई भी काम उसके हौसले से बड़ा नहीं है। वह लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें तो समाज और राष्ट्र भी तेजी से प्रगति करेगा।
पंचायत राज की मुखिया है रश्मिसिंह
पंचायतराज की कमान भी नारी शक्ति के हाथाें में है। रश्मिसिंह पाली जिले के रोहट जिला प्रमुख है। पूर्व में भी वे पंचायत समिति प्रधान रहीं। सिंह का पंचायतराज का लंबा अनुभव रहा है और गहरी पकड़ है। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए कई नवाचार किए। राजनीति से भी गहरा नाता है। वे महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहती है। पंचायतराज की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और गांवों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए वह निरंतर काम कर रहीं है।
सुनीता कंवर ने बनाई खुद की पहचान
पंचायत समिति रोहट की प्रधान सुनीता कंवर राजपुरोहित ने सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। 2015 में वह पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित हुईं। पंचायत समिति में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मुखर रहीं। 2020 में दोबारा जीतीं। वे जिले में कांग्रेस की एकमात्र प्रधान है। सुनीता कंवर ने कोरोना महामारी हो या लंपी, हर बार अपनी सक्रियता का परिचय दिया। पंचायत समिति क्षेत्र में उन्होंने पंचायतराज की योजनाओं को धरातल पर लाने का काम किया।
महिलाओं को बना रही सजग प्रियंका
राजस्थान हाईकोर्ट की अधिवक्ता प्रियंका बोराणा महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग करने में जुटी है। वे समय-समय पर महिलाओं के बीच जाकर उन्हें कानूनी अधिकारों से अवगत करातीं है। उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करती हैं। कई बड़े मामलों में पैरवी कर प्रियंका ने खुद को वकालात के पेशे में भी ऊंचा स्थान दिलाया। प्रियंका का कहना है कि महिलाओं का संघर्ष, समर्पण, साहस, और संवेदनशीलता समाज को सशक्त बनाती हैं। वह पुरुषों के साथ जुड़कर एक सुसंगत, समृद्ध और समान समाज की ओर ले जाती हैं। महिलाएं समाज की धारा है जो स्नेह, सहानुभूति और समरसता की प्रतीक हैं। महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान ही महिला दिवस है।
Published on:
08 Mar 2024 03:48 pm
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