
पाली।
तीन महीनों के इंतजार के बाद शनिवार से कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी का रोमांच शुरू हो जाएगा। वन विभाग ने इसकी पूरी तैयारियां कर ली है। इस बार टिकट, सफारी और जिप्सियों के साथ चालकों के चेहरे भी जाने-पहचाने होंगे। लेकिन, जंगल का अंदाज जुदा-जुदा सा दिखेगा। कुदरत ने अच्छी बारिश के साथ अभयारण्य क्षेत्र में इस बार नायाब खूबसूरती बिखेरी है। जिसे हर सैलानी अपने कैमरों के साथ नजरों में कैद कर ले जाना चाहेगा। पाली, उदयपुर और राजसमंद जिले की सरहद पर अरावली पर्वतमाला की गोद में आबाद कुंभलगढ़ वन्य जीव अभयारण्य लगभग 578 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। इस अभयारण्य के कुदरती सौन्दर्य को निहारने के साथ यहां स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्य जीवों की अठखेलियां देखने के लिए देश-दुनिया के सैलानी यहां आते हैं। कुंभलगढ़ स्थित वन विभाग की सूचना को आधार मानें तो अभयारण्य में अक्टूबर से तीस जून तक के सीजन में लगभग तीस हजार से अधिक देसी-विदेशी सैलानी जंगल सफारी का रोमांच लेते हैं। सैलानियों को सफारी के दौरान यहां पैंथर, भालू, जरख, हिरण, सांभर आदि देखने को मिलते हैं।
इस बार क्यों है सफारी खास
कुंभलगढ़ अभयारण्य की जंगल सफारी इस साल कुछ मायनों में खास रह सकती है। इस बार कुदरत ने अभयारण्य क्षेत्र को अप्रतिम सौन्दर्य बख्शा है। इस कारण यहां आने वाले सैलानियों को निराशा हाथ नहीं लगेगी। इसके साथ सफारी के टिकट की दरें भी नहीं बढ़ाई गई है। पिछले साल सफारी के लिए छह लोगों के वास्ते किराया 1850 रुपए था, जिसे भी इस साल बरकरार रखा गया है। राजसमंद डीएफओ कार्यालय ने कुंभलगढ़ फॉरेस्ट चौकी को सफारी के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसकी पालना में शनिवार सवेरे जिप्सी संचालकों व इको गाइड्स के साथ वन विभाग की बैठक के बाद जंगल सफारी शुरू कर दी जाएगी। कुंभलगढ़ क्षेत्र के रेंजर देवेन्द्र पुरोहित का कहना है कि शनिवार सवेरे बैठक में जिप्सी संचालकों व इको गाइड्स को विभाग की आवश्यक शर्ते बताई जाएगी।
Published on:
07 Oct 2017 11:20 am
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