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कर्नाटक के कुरूक्षेत्र में, मारवाड़ीयो की रहेगी अहम भूमिका

बैंगलूरू की 9 सीटों पर सीधा प्रभाव

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कई सीटों पर परिणाम तय करेंगे प्रवासी

पाली. देशभर में एक कहावत प्रचलित है, ‘जहां न पहुंचे बैलगाड़ी, वहां पहुंचे मारवाड़ी’। मारवाड़ी यानी राजस्थान का मूल निवासी। देश का शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा, जो मारवाडिय़ों की पहुंच से परे हो। ऐसा ही प्रदेश है कर्नाटक, जहां लाखों की तादाद में मारवाड़ी निवास करते हैं। हरे-भरे और ठण्डे प्रदेश का पारा इन दिनों विधानसभा चुनाव के कारण चढ़ा हुआ है। देशभर का सियासी तापमान बढ़ाने वाले कर्नाटक में इस बार सियासी गणित बिठाने में मारवाडिय़ों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। इसके लिए राजनीतिक दलों ने भी प्रवासियों को रिझाने का मजबूत कैम्पेन चलाया है।

224 विधानसभा सीट वाले कर्नाटक प्रदेश में अगले सप्ताह चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। स्थानीय मतदाताओं के साथ-साथ मारवाड़ी मतदाताओं को रिझाने पर राजनीतिक पार्टियों का पूरा जोर है। इसके लिए प्रवासी सम्मेलन किए जा रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस व जनता दल ( ध) समेत अन्य पार्टियां भी प्रवासियों का समर्थन जुटाने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं। मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कवायद में शादी-समारोह में राजस्थान आए प्रवासियों को पुन: कर्नाटक बुला लिया गया है।

बैंगलूरू की 9 सीटों पर सीधा प्रभाव

कर्नाटक की राजधानी बैंगलूरु में राजस्थानी प्रवासियों की तादाद सर्वाधिक है। एक आंकलन के मुताबिक अकेले बैंकलूरु शहर में 10 लाख से ज्यादाता मारवाड़ी मतदाता हैं। कुल 28 सीटों में से चिकपेट, गांधीनगर, मल्लेश्वरम, राजाजी नगर, यशवंतपुर, शांतिनगर, सीवी रमन नगर, जय नगर और बीटीम विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों की हार-जीत का फैसला राजस्थानी प्रवासी ही करते हैं। जबकि अन्य सीटों पर भी मारवाडिय़ों का पूरा दखल है। प्रवासियों का जुड़ाव विभिन्न राजनीतिक दलों से है।

मेसूर-हुबली में भी दबदबा

कर्नाटक प्रदेश के अन्य शहरों में भी राजस्थानी प्रवासी निवासरत है। बैंगलूरु के अलावा मेसूर, हुबली, धारवाड़, टमकुर, विजयनगर, कलबुर्गी समेत कई शहरों में राजस्थान के लोग व्यापार के सिलसिले में बरसों से रह रहे हैं। ऐसे में यहां का सियासी गणित मारवाडिय़ों के बिना अधूरा है। कर्नाटक में रहने वाले प्रवासियों में ज्यादातर पाली, जालोर, सिरोही और जोधपुर जिलों के लोग हैं।

प्रवासियों का समर्थन जुटा रहे मारवाड़ के नेता

प्रवासी मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने में कोई भी राजनीतिक दल कसर नहीं छोड़ रहा। कैम्पेन में मारवाड़ के नेताओं की खेप चुनाव प्रचार में लगी हुई है। भाजपा में केन्द्रीय मंत्री पीपी चौधरी और गजेन्द्रसिंह शेखावत प्रवासियों को रिझाने में लगे हैं। वहीं कांगे्रस ने महासिचव अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के कार्यक्रम भी तय किए हैं। पायलट 8 मई को प्रवासी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस के पाली जिलाध्यक्ष चुन्नीलाल चाड़वास को भी बैंगलूरु में राजस्थानी लोगों का समर्थन हासिल करने का जिम्मा दिया है। वहीं, जिला प्रमुख पेमाराम सीरवी, पूर्व सांसद पुष्प जैन, मारवाड़ जंक्शन विधायक केसाराम चौधरी समेत कई नेता भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। मारवाड़ के दर्जनों नेताओं ने इन दिनों कर्नाटक में डेरा डाल दिया है और प्रवासियों को मनाने में लगे हैं। जनता दल (ध) के लिए भी प्रदेश सचिव राजेन्द्रसिंह कुम्पावत समेत कई नेता प्रवासियों से समर्थन जुटाने की कवायद में है।

व्यापार में भी बुलंदी

राजस्थान के बाशिंदों की पहुंच केवल राजनीतिक समीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार के क्षेत्र में भी उन्होंने प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रवासी राजस्थानियों ने व्यापार में भी कर्नाटक में बुलंदियां हासिल की है। ज्वैलरी, किराणा, कपड़ा इत्यादि कई ऐसे व्यवसाय है जिनमें मारवाड़ के लोगों का एकाधिकार है। यही कारण है कि दर्जनों ऐसे विधानसभा क्षेत्र में है, जहां चुनावी समीकरण राजस्थानी प्रवासियों के ईर्द-गीर्द रहते हैं।

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व्यापार में भी अग्रणी है मारवाड़ी

राजस्थान के कई जिलों के लोग यहां बहुतायत में रहते हैं। व्यापार के क्षेत्र में भी मारवाड़ के लोग अग्रणी है। विधानसभा चुनाव में भी उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक दलों की भी पूरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा प्रवासियों का समर्थन जुटाया जाए।

पूनाराम चौधरी, प्रवासी प्रकोष्ठ, बैंगलूरु

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कई सीटों पर परिणाम तय करेंगे प्रवासी

कर्नाटक की कई विधानसभा सीटों का चुनाव परिणाम प्रवासी राजस्थानी तय करेंगे। प्रवासियों की तादाद काफी है। खासतौर से बैंगलूरु की हर सीट पर मारवाड़ी मतदाता रहते हैं। निश्चित रूप से कर्नाटक के चुनाव में राजस्थानियों का समर्थन महत्वपूर्ण साबित होगा।

राजेन्द्रसिंह कुम्पावत, व्यावसायी, बैंगलूरु