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VIDEO : क्यों अनदेखी का शिकार है पाली का पुष्कर कहा जाने वाला लाखोटिया…

- लाखोटिया तालाब के पुराने घाटों की नहीं ली जा रही सुध - मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन योजना में ठीक करवाई बावड़ी भी फिर हो गई मैली

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पाली

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Rajeev Dave

Nov 03, 2017

lakhotiya dam

पाली.

पाली के पुष्कर कहे जाने वाले लाखोटिया तालाब के पुराने घाटों का अब कोई धणी-धोरी नहीं है। जिन घाटों पर मेले भरते थे। जल में प्रभु झुलते थे और महिलाएं गणगौर पर लोटियां भरकर ले जाती थी। वहां आज सिर्फ गंदगी पसरी है। गंदगी भी इतनी की घाटों से होकर तालाब के जल तक जाने की इच्छा तक नहीं होती है। घाटों के पत्थर व वहां बने बैठने के स्थलों के पत्थर निकल रहे है। बावजूद इसके नगर निकाय की ओर से घाटों का जीर्णोद्धार कर इनके खोए सौन्दर्य को लौटाने की तरफ एक भी कदम नहीं बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में हमारा पुष्कर अपने खोए हुए वैभव व सौन्दर्य को पाने के लिए आंसू बहा रहा है।

800 साल पहले हुई थी खुदाई

लाखोटिया तालाब की खुदाई आज से करीब 800 साल पहले हुई थी। बुजुर्गों की माने तो तालाब में करीब 100 बेरियां थी। वहीं गांधी मूर्ति के पास से लेकर वर्तमान नया हाउसिंग बोर्ड के पास तक बने तालाब में कई घाट थे। इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध घाट सिरे घाट है। इसी घाट से सटे हुए है मुनिपुरी घाट आदि। इन सभी घाटों पर पुष्कर तर्ज पर मंदिर भी बने हुए है। जो अलग-अलग समाजों के है। वहां अन्नकूट महोत्सव के साथ अन्य आयोजन भी होते है, लेकिन घाटों की दशा नहीं सुधारी जा रही।

लोग नाम तक भूल गए

घाटों की अनदेखी के कारण आज की पीढ़ी को तो इनके बारे में जानकारी तक नहीं है। अग्रवालों की बगेची के पास, उसी के निकट एक अन्य घाट के अलावा कई छोटे-मोटे घाट भी तालाब के किनारे बने हुए है। कई घाटों को तो अब पाटकर बंद तक कर दिया गया है।

परिषद ने भी नहीं छोड़ी कसर

घाटों को पाटने का काम नगर परिषद ने भी किया। रामनगर क्षेत्र में बने बड़े घाट पर मिट्टी डालकर कच्चा रास्ता बना दिया गया। लोगों ने इस पर कचरा डालना शुरू कर दिया। आज हालात यह है कि करीब सात-आठ साल पहले तक जो घाट नजर आता था। वह अब लोगों के जेहन में भी नहीं रह गया है। हालांकि, इस घाट से मिट्टी हटाकर लाखोटिया से नया हाउसिंग बोर्ड तक तालाब को एक बार फिर एक करने के टेंडर हो गए है, लेकिन मार्ग तोड़कर मिट्टी अब तक नहीं निकाली गई है।

बावड़ी का पैसा गया पानी में

मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन के तहत नगर परिषद की ओर से सिरे घाट पर कलाबा बावड़ी का जीर्णोद्धार करवाया गया था। इस पर पिछले दिसम्बर में 3.82 लाख रुपए खर्च भी किए गए, लेकिन आज यह बावड़ी फिर से उपेक्षा का शिकार हो गई है। पूरी बावड़ी कचरे से अटी है। वहीं दीवार तक टूटी है।

यूआईटी को भी धरोहर की परवाह नहीं

यूआईटी को भी शहर की धरोहरों से सरोकार नहीं है। वह भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। वहीं तालाब पर बने घाटों को संवारने के लिए कदम बढ़ा रही है। ऐसे में हमारी धरोहर धूल धुसरित हो रही है।

पुरातत्व विभाग से करवाएंगे कार्य

तालाब के प्राचीन घाटों का जीर्णोद्धार पुरातत्व विभाग के सहयोग से करवाया जाएगा। इसके अलावा तालाब के घाट पर जाली लगवाई जाएगी। बावड़ी को सुधारने के लिए भी प्रपोजल बनवाया है।

महेन्द्र बोहरा, सभापति, नगर परिषद, पाली