
संथारा साधक सोहनराज चौपड़ा का संथारा सीजने पर दी गई अंतिम विदाई
जीवन के 90 बसंत देखने के बाद संथारा लेने वाले श्रावक सोहनराज चौपड़ा ने नश्वर शरीर 28 जनवरी शाम को त्यागा। उनकी बैकुंठी यात्रा सोमवार सुबह वीडी नगर स्थित उनके निवास से निकाली। जो विभिन्न मार्गों से हिन्दू सेवा मण्डल पहुंची। वहां हजारों लोगों ने संथारा श्रावक चौपड़ा को अंतिम विदाई दी। इसके बाद दोपहर में आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि सुमति कुमार की निश्रा में स्मृति सभा हुई। जिसमें वक्ताओं ने भावना व्यक्त की। संचालन कवि प्रमोद भंसाली ने किया।
सभा में व्यक्त किए भाव
सभा में पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, पूर्व सभापति नगर परिषद सभापति महेन्द्र बोहरा, गौतमचंद कवाड़, तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेंद्र सालेचा, मंत्री जीतमल पटावरी, महासभा सदस्य गौतम छाजेड़, भंवरलाल नाहटा, सोहनराज बालड़ आदि ने भाव व्यक्त किए। सभा में अचलचंद चौपड़ा, गुमानमल भंसाली, अचलचंद बालड़, केशरीमल कटारिया, अमरचंद समदड़िया, सज्जनराज बांठिया, सुशील लूणावत, भरत गोगड़, डूंगरचंद चौपड़ा, पूनमचंद चौपड़ा, महावीर चौपड़ा, अभिषेक दुग्गड़, राजेश गादिया के साथ चौपड़ा परिवार व जैन समाजबंधु मौजूद रहे।
चौपड़ा ने 4 जनवरी को स्वीकारा था संथारा
श्रावक चौपड़ा ने 4 जनवरी को आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से मुनि सुमति कुमार, मुनि देवार्य कुमार, मुनि आगम कुमार के सान्निध्य में संथारा स्वीकार किया था। उनका संथारा 28 जनवरी की शाम को सीजा। चौपड़ा ने करीब 22 वर्ष पूर्व प्रण किया था कि आयु 90 वर्ष पूर्ण होने पर अन्न, जल त्यागकर संथारा ग्रहण करूंगा। उससे पूर्व शरीर में कोई व्याधि होने पर पहले संथारा ग्रहण कर सकता हूं। इस प्रतिज्ञा के तहत ही उन्होंने संथारा स्वीकार किया था।
अंतिम समय 7 दिन चौविहार संथारा
चौपड़ा ने जीवन में 5 बार अटठाई तप किया। उन्होंने 34 वर्ष तक चौविहार, 40 वर्ष तक जमीकंद का त्याग, 40 वर्ष से प्रतिदिन सामायिक, 8 साल तक आठम व चौहदस का उपवास, 5 वर्ष से प्रत्येक गुरुवार एकासन, 27 साल से चांदनबाला तप किया। उन्होंने 2 माह में 6 तेले की तपस्या के बाद 25 दिन का संथारा ग्रहण कर किया था। अंतिम समय में 25 दिन के संथारे में 7 दिन चौविहार संथारा (बिना अन्न व जल ग्रहण) किया।
Published on:
29 Jan 2024 07:25 pm
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