मानसून में मौसमी बीमारियां फैलने के खतरे को देखते हुए जून माह से ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सजग रहना था। वह सजग तो हुआ, लेकिन महज कागजों में। इसमें आंकड़े बना दिए गए। यह शहर व गांवों के हालात बता रहे हैं। अस्पतालों की भीड़ बयां कर रही है। पाली के बांगड़ अस्पताल में ही रोजाना आने वाले करीब 2000 से अधिक मरीजों में से आधे सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार व पीलिया आदि से पीडि़त है। हालात यह है कि शहर में कई जगह पर पानी भराव हो रखा है, लेकिन वहां एंटी लार्वल गतिविधि को अंजाम नहीं दिया गया है। ऐसे में गांवों की िस्थति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
शहर के इन क्षेत्रों में खतरा
शहर के कई क्षेत्रों में बरसात का पानी खाली भूखण्डों के साथ मैदानों में भरा है। वहां मच्छर पनप रहे हैं, लेकिन एंटी लार्वल गतिविधियां नजर नहीं आ रही। पाली शहर के ही बांगड़ कॉलेज परिसर, रजत विहार, सूर्या कॉलोनी, नया गांव के दोनों तरफ बसे क्षेत्र, केशव नगर, आदर्श नगर नहर, हाउसिंग बोर्ड नहर, टैगोर नगर, बजरंगवाड़ी, पठान कॉलोनी, रजा कॉलोनी आदि में पानी भरा है। वहां मच्छरों की भरमार है। ऐसे में बीमारियां फैलने का खतरा है।
करवाई जा रही गतिविधियां
एंटी लार्वल गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। मौसमी बीमारियों की रोकथाम के सभी प्रबंध भी कर लिए गए है।
डॉ. इन्द्रसिंह राठौड़, सीएमएचओ, पाली
यह करना था मौसमी बीमारियाें की रोकथाम के लिए
एंटी लार्वल गतिविधियां: टेमीफोस, बीटीआई, एमएलओ, गम्बुसिया आदि की उपलब्धता व हैचरीच का सुदृढ़ीकरण
लार्वा प्रदर्शन: आमजन को जागरूक करने के लिए चिकित्सा संस्थानों व प्रशासन शहरों के संग में लार्वा प्रदर्शन
फोगिंग: स्थानीय निकाय के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में फोगिंग करना
आइइसी: मौसमी बीमारियाें से बचाव के लिए चिकित्सा संस्थानों व प्रमुख स्थानों पर बैनर, होर्डिंग, फ्लेक्स आदि लगावाना।
मलेरिया व डेंगू रोधी अभियान: एएनएम व आशाओं के माध्यम से घर-घर सर्वे, बुखार के रोगियाें का सर्वे, एंटी लार्वल गतिविधियां करना