
पाली. जिलेभर के लोगों को चिकित्सा की बेहतर सुविधा मुहैया कराने सरकार ने जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल तो बना दिया। लेकिन, अभी भी मरीजों की परेशानी नहीं मिट पाई है। कुछ ऐसी ही परेशानी है अस्पताल में पिछले एक साल से लगातार दवाओं की कमी की। ऐसे में आज भी अस्पताल में आने वाले मरीजों को पर्ची की आधी दवा जेब के पैसे खर्च कर खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों की माने तो अस्पताल में दवाओं के टोटे को लेकर हर सप्ताह डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन दवाओं की सप्लाई भी पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों की जेब पर पड़ रहा है।
285 तरह की दवा की आवश्यकता
जानकारी है कि सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर अस्पताल में मरीजों के लिए 600 तरह की दवाओं को नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का दावा किया जाता है। लेकिन, पिछले एक साल से अस्पताल में मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों की माने तो वर्तमान में अस्पताल में 285 तरह की दवाओं की आवश्यकता है।
महंगे दामों में दवा खरीदना मजबूरी
नि:शुल्क दवा केंद्र पर दवा नहीं मिलने के बाद मरीजों व परिजनों के पास 32 नंबर कमरे का विकल्प होता है। जहां उन्हे रियायत दर पर दवा मिल जाती है। लेकिन, सबसे बड़ी समस्या मरीजों के लिए तब आ जाती है। जब इस कमरे में भी दवा उपलब्ध नहीं होती है। इसके बाद मरीजों को बाजार से महंगे दाम में ही दवा खरीदनी पड़ती है।
हर सप्ताह भेज रहे डिमांड
अस्पताल में अभी दवाओं की कमी है। अस्पताल की ओर से हर सप्ताह के मंगलवार को दवाओं की डिमांड की जा रही है। अस्पताल को जितनी दवा सप्लाई होती है। वह मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही है।
- डॉ. एमएस राजपुरोहित, अधीक्षक, बांगड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल
Published on:
11 May 2018 01:07 pm
बड़ी खबरें
View Allपाली
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
