
यहां करोड़ों के वाहन हो रहे हैं कबाड़
पाली जिले सहित प्रदेश भर के पशुपालकों को उनके दर पर ही पशुओं के दर्द दूर करने के लिए गत वर्ष दिसम्बर में आए करोड़ों रुपए के मोबाइल वेटेनरी यूनिट वाहन बिना उपयोग के ही पड़े हैं। करीब दो माह गुजरने के बाद भी निदेशालय से वाहनों के उपयोग या वापस भेजने संबंधित आदेश नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यह वाहन प्रदेश भर के पशु चिकित्सालयों में इन दिनों धूल चाट रहे हैं।
यह थी योजना
प्रदेश पशु सम्पदा की दृष्टि से काफी समृद्ध है। प्रदेश सरकार की ओर से पशुओं के लिए दवाएं तो नि:शुल्क है। पर, कई बार पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाने की वजह से असमय ही पशुधन साथ छोड़ देते हैं। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से पशुओं को पशु चिकित्सालय तक लाने में भी कई समस्याएं सामने आती हैं। इस समस्या के निवारण के लिए पशुपालन विभाग ने जिले सहित पूरे प्रदेश में मोबाइल वेटेनरी यूनिट वाहन दिसम्बर 2023 में भेजे थे। इसके तहत पूरे प्रदेश में 536 वाहनों की आपूर्ति पूरे प्रदेश में करनी थी। इनमें से 328 वाहनों की भी आपूर्ति हो गई थी।
वाहन आते ही लगा ब्रेक
दिसम्बर 2023 में वाहन आने के कुछ दिनों के उपरांत ही पशुपालन विभाग के निदेशक ने वित्त विभाग का हवाला देते हुए सेवा प्रदाता संस्थानों को पत्र जारी कर वाहनों की आपूर्ति रोकने के आदेश दिए। साथ ही आपूर्ति की गई वाहनों के उपयोग पर भी रोक लगा दी। इसके बाद से वाहन पशुपालन विभाग के जिला कार्यालयों में जस के तस पड़े हुए हैं।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस
मोबाइल वेटेनरी यूनिट वाहन अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं। इसमें पशुओं को आपातकालीन समय में दी जा सकने वाली समस्त चिकित्सा उपकरण तथा सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रत्येक वाहन के साथ एक चिकित्सक, एक सहायक और एक चालक की व्यवस्था की गई थी। इन वाहनों में आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध करने के निर्देश थे। इस वाहन में पशुओं के गोबर, मूत्र एवं रक्त जांच की सुविधा भी हैं। यह वाहन संचालन की जिम्मेदारी अनुबंधित संस्था के माध्यम करने के प्रावधान तय किए थे। योजना के अनुसार एक लाख मवेशियों पर एक वाहन की व्यवस्था करते हुए नियमित आठ घंटे की सेवाएं लेना तय किया था।
यह भी थी व्यवस्था
योजना के तहत जिला मुख्यालय पर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने, ब्लॉक अधिकारी को योजना से जोडऩे, वाहन को ब्लॉक मुख्यालय पर रखने, कॉल आने पर पशुपालकों के घर भेजने, टोल फ्री नम्बर भी पशुपालकों को जारी करना था। पशुपालक टोल फ्री पर कॉल कर पशुओं के टीकाकरण, उनके गर्भादान सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाएं देना तय किया था।
फैक्ट फाइल
- 536 वाहनों की समूचे प्रदेश में करती थी आपूर्ति
- 328 वाहनों की गई आपूर्ति
- 208 गाडिय़ों की आपूर्ति करनी बाकी
- 20 वाहन मिलने थे पाली को
- 13 वाहन ही मिल पाए जिले में
पाली में पशुओं की स्थिति
3, 60 हजार गाय-बैल हैं पाली में
3,29,807 भैस हैं जिले में
15 लाख भेड़-बकरी हैं जिले में
अधिकारी ने कहा...
जिले के लिए 20 वाहन आवंटित होने थे, लेकिन 13 वाहन मिले। वाहनों का उपयोग अब तक नहीं हुआ है, लेकिन अब कार्ययोजना बना रहे हैं। शीघ्र ही शुभारंभ करेंगे।
- मनोज पानवा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, पाली
Published on:
14 Feb 2024 05:45 pm
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