
पाली. चुनावी वर्ष में शहरी विकास के लिए शनिवार को नगर परिषद का बजट पेश किया गया। यह बजट पिछले साल से 62.19 करोड़ रुपए अधिक है। हालाकि, एक साल बाद हुई परिषद की बैठक में सिवाय हंगामे के कुछ नहीं हुआ। महज 30 मिनट में बजट प्रस्तावों को सत्ता पक्ष ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस बैठक में पहली बार सरकारी विभागों के अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन शहर के विकास सम्बन्धी एक भी प्रस्ताव पर चर्चा तक नहीं हुई।
नगर परिषद बोर्ड बैठक की शुरुआत से ही कांग्रेस के पार्षदों ने घेरना शुरू कर दिया। सर्वप्रथम कांग्रेसी पार्षद सीताराम शर्मा ने विशेष बैठक की मांग करने के बावजूद बैठक नहीं बुलाने पर जवाब मांगा। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष भंवर राव ने कहा कि बजट बैठक है तो अन्य विभाग के अधिकारियों को क्यों बुलाया गया। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारियों को बुलाने की जानकारी पूर्व में दी जाती तो वे संबंधित मुद्दे लेकर आते। इस बीच पक्ष और विपक्षी पार्षदों के बीच हंगामा बढ़ गया। मामला बढ़ता देख सभापति महेन्द्र बोहरा ने बजट प्रस्ताव सदन के सामने रखे, जिसे सत्ता पक्ष ने ध्वनि मत से पारित कर दिया।
इस प्रकार है शहरी विकास का बजट
- 242 करोड़ 3 लाख 86 हजार रुपए है आगामी वित्तीय वर्ष का बजट अनुमानित।
- पिछले साल से 62.16 करोड़ रुपए अधिक है।
- वर्ष 2017-18 में 179 करोड़ 84 लाख 70 हजार रुपए था बजट।
सभापति का शायराना अंदाज
विपक्ष के सवाल के जवाब में जब बोहरा जवाब देने लगे तो विपक्ष ने फिर हंगामा किया। इसके बाद बोहरा ने शायराना अंदाज में कहा कि दिलरुबा दिल की सुना दे सुनने वाला कौन है...। इसके बाद भाजपा समर्थित पार्षद किशोर सोमनानी ने चौराहों के आवंटन किस नियम के तहत करने का सवाल उठाया। लेकिन, इसका कोई जवाब सत्ता पक्ष की ओर से नहीं दिया गया।
लोकतंत्र पर खड़े किए सवाल
विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर लोकतंत्र की हत्या कर अपनी मनमर्जी चलाने का आरोप लगाया तो सभापति सहित अन्य सत्ता पक्ष के पार्षदों ने सरदार पटेल के प्रधानमंत्री बनने जैसे राष्ट्रीय मुद्दे उठा दिए। इसके बाद हंगामा और बढ़ गया।
तख्तियां और काली पट्टी बांध आए विपक्षी
विपक्ष के पार्षद विरोध जताने के लिए काली पट्टी बांध कर सदन में आए। उन्होंने सदन में अपने-अपने वार्ड क्षेत्र में कार्य नहीं होने की तख्तियां भी लहराई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राव ने राजस्थान पत्रिका अखबार दिखाकर सड़कों की बदहाली भी सामने रखी।
विकास दब गया और राजनीति हावी रही
नगर परिषद की बोर्ड बैठक में शनिवार को शहर विकास पूर्ण रूप से राजनीति की भेंट चढ़ गया। सत्ता पक्ष जहां अपने वोट बैंक मजबूत करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने का दावा करता रहा तो वहीं हंगामे के बीच विपक्ष भी विकास कार्यों पर चर्चा तक नहीं कर पाया। जबकि बैठक में पहली बार डिस्कॉम, पीडब्ल्यूडी और जलदाय विभाग सहित अन्य विभागों के अधिशासी अभियंता और अन्य अधिकारियों को बुलाया गया था।
Published on:
11 Feb 2018 03:01 pm
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