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अमेरिका के टेक्सास में सेवाएं दे रहे पाली के डॉक्टर ध्रुव राजपुरोहित, सप्ताहभर में कर रहे 80 घंटे की ड्यूटी

पत्रिका कर्मवीर अभियान :

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पाली

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Suresh Hemnani

May 27, 2020

अमेरिका के टेक्सास में सेवाएं दे रहे पाली के डॉक्टर ध्रुव राजपुरोहित, सप्ताहभर में कर रहे 80 घंटे की ड्यूटी

अमेरिका के टेक्सास में सेवाएं दे रहे पाली के डॉक्टर ध्रुव राजपुरोहित, सप्ताहभर में कर रहे 80 घंटे की ड्यूटी

पाली/उदयपुर। पाली जिले की बाली तहसील के सोकड़ा गांव के इंटरनल मेडिसिन डॉ. ध्रुव राजपुरोहित अमेरिका के टेक्सास राज्य के लॉन्ग व्यु शहर के क्रिस्टस गुड शेफर्ड मेडिकल सेंटर में कोराना महामारी के दौर में ड्यूटी दे रहे हैं। महामारी फैलते ही उन्होंने फरवरी में पत्नी को गांव में मां के पास भेज दिया और खुद रोजाना करीब 12 घंटे काम कर रहे हैं।

वे बताते हैं, सप्ताह में 80 घंटे काम के तय करते हैं। सामान्य दिनों के मुकाबले दबाव और खतरा ज्यादा है। कई प्रकार के संक्रमण के खतरे के चलते पहले भी ड्यूटी पर गाउन पहनते थे, लेकिन अब पहनकर काम करना मुश्किल है। पाली में उनकी मां और अन्य परिजन रहते हैं। पूरा गांव उनकी फ्रिक करता है। लोग मां से बेटे की खैर-खबर लेते हैं। अपनापन दोनों तरफ से इतना ही की ड्यूटी के बीच भी उनके गांव में कोई बीमार हो तो उसकी पर्ची और जांच रिपोर्ट व्हाट्सअप पर मंगवाकर उन्हें जरूरी दवा और सलाह लिखते हैं। डॉ धु्रव बताते हैं कि अमेरिका के मरीजों में कोरोना का जबरदस्त डर और अनिश्चितता है। महामारी से पहले मरीज हंसी-खुशी और मजाक करते थे, अब तनावग्रस्त और डरा हुआ चेहरा लेकर आ रहे हैं।

खतरे के बीच किसी के परिवार के साथ-साथ आने के लिए मना करने पर वे कई बार चिढ़ भी जाते हैं। उन्होंने बताया कि यूएस में मेडिकल उपकरण आइसीयू, प्रशिक्षित स्टाफ , वेंटीलेटर्स, स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल केयर यूनिस्ट्स और कार्डियोलॉजी यूनिट्स में पर्याप्त सुविधाएं हैं, लेकिन लोग अब खुद ही खतरे को आप कर सोशल डिस्टेंसिंग बनाने में लगे हैं। वे बताते हैं कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी की काफी गुंजाइश है। उपकरण कम है, मेडिकल स्टाफ में कौन क्या है, क्या जिम्मेदारी है, इसका पता नहीं चलता। खासकर गांवों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। डॉ. ध्रुव उसके उदाहरण में खुद की शादी में काकी के बीमार होने आपातकालीन सुविधाएं नहीं मिल पाने की घटना का जिक्र करते हैं।

राजनीतिक नेतृत्व को मानते हैं भारतीय
ध्रुव ने बताया कि भारत में सरकारों के निर्देश को लोगों ने माना, इसलिए संक्रमण नियंत्रण में रहा, मौतें भी काफी कम है। लोगों ने खुद को आइसोलेशन में रखा। इसके उलट अमेरिका में हर स्तर पर स्वतंत्रता के आदि समुदाय ने प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों को समझना मुश्किल है।


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