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जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल बनने के बाद बदली कई सुविधा….. लेकिन, लोग अभी भी नहीं है रूबरू

पाली. जिले का सबसे बड़ा बांगड़ अस्पताल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल बनने के सुविधाओं के मामले में काफी बदल गया है। लेकिन, अभी जिले की जनता इससे पूरी तरह से रूबरू नहीं हो पाई है। अभी भी यहां आने वाले कई मरीज अस्पताल की पुरानी व्यवस्थाओं को ही भांप कर अपने अनुसार आते है। लेकिन, यहां आने के बाद उन्हे परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या लोगों को ओपीडी समय को लेकर आ रही है। पिछले कई माह से मेडिकल कॉलेज सुविधा विस्तार होने के बाद से अस्पताल की ओपीडी एक समय कर दी गई है। अब अस्पताल की ओपीडी एक समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ही संचालित होती है। लेकिन, लोग अभी भी पुरानी ओपीडी का समय जानकार शाम के समय भी उपचार करवाने के लिए आते है।    

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जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल बनने के बाद बदली कई सुविधा

1. ट्रोमा सेंटर - अम्बेडर सर्कल से अस्पताल के मुख्य द्वारा पर घुसते ही सबसे पहले ट्रोमा सेंटर आता है। यहां ओपीडी बंद होने के बाद इमरजेंसी तौर पर मरीजों का उपचार किया जाता है। यहां के अंदर के रास्ते ही पूराने कॉटेज वार्ड है। जहां अब नई ओपीडी संचालित होती है। यहां हर समय इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध रहती है।

2. अस्पताल का मेन गेट - ट्रोमा वार्ड से कुछ दुरी पर सामने ही यह अस्पताल का मेन गेट है। इसके अंदर प्रवेश करते ही बाए तरफ से नई ओपीडी का रास्ता है। इस नई ओपीडी में ईएनटी, सर्जिकल, नेत्र विभाग, हड्डी से संबंधित मरीजों की जांच के लिए डॉक्टर के चेम्बर है। वहीं इस गेट से सामने की तरफ जाने पर अस्पताल अधीक्षक कक्ष, मेडिकल वार्ड, बर्न वार्ड, जीएनएम संस्थान का गेट, मोर्चरी का रास्ता, मौसमी वार्ड, सर्जिकल वार्ड व आईसीयू का रास्ता मिलता है। वहीं इसके दाहिनी तरफ जाने पर जांच रूम है। जहां सोनोग्राफी, एक्स-रे होते है, वहीं निशुल्क दावा का सेंटर, दंत विभाग की ओपीडी संचालित हो रही है।

3. अस्पताल का तीसरा गेट व रजिस्ट्रेशन काउंटर - यहा पर दो रजिस्ट्रेशन काउंटर बना रखे है। जिसमे महिला व पुरूष मरीजों के लिए अलग-अलग पर्ची काटने की व्यवस्था है। इस परिसर में दाहिने तरफ त्वचा संबंधी व सभी फिजीशियन बैठते है। साथ ही इसके बाद ही विभिन्न जांच के नमुने लेने के लिए लैब भी है। वहीं बाए तरफ टीबी एडं चेस्ट और मनोरोग से जुडी ओपीडी संचालित होती है। इसके सीधे सामने जाने पर सबसे पहले निशुल्क दवा काउंटर व इसके बाद मेडिकल वार्ड, सर्जिकल वार्ड आते है।

4. मातृ शिशु केंद्र - महिला रोग व शिशु रोग के लिए इस बिल्डिंग को पूरी तरह से अलग बनाया गया है। यहां प्रसुती, महिलाओं से जुडे सभी रोग, बच्चों की की जांच के लिए ओपीडी बनी हुई है। प्रसव भी इसी बिल्डिंग में करवाए जाते है।