
पाली.
अपनी कार्यशैली के कारण चर्चा में आई उपखण्ड अधिकारी सुमित्रा पारीक का आखिरकार तबादला हो गया। पहले उनके विरोध में बीजेपी जनप्रतिनिधियों और फिर उनके पक्ष में अभियान चलाकर राजनीतिक जमीन पर काफी उठापटक हुई। अब उनके स्थानांतरण आदेश के बाद सोशल मीडिया पर घमासान शुरू हो गया है।
राज्य सरकार ने रविवार को राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए। पाली उपखण्ड अधिकारी पारीक को जोधपुर जिले के बाप में लगाया गया है। जबकि बाड़मेर के सिणधरी से महावीरसिंह को पाली एसडीएम लगाया गया है। पारीक ने फरवरी माह में कार्यभार ग्रहण किया था और अपनी कार्यप्रणाली को लेकर काफी चर्चा में रही थी। बीते दिनों बीजेपी के जनप्रतिनिधियों ने उनकी कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद एसडीएम पारीक के पक्ष में भी कुछ लोग उतर आए थे। रविवार को उनका तबादला आदेश जारी होते ही सोशल मीडिया पर विधायक ज्ञानचंद पारख को टारगेट बनाते हुए कई पोस्ट वायरल होने लगी। कई लोग विधायक के विरोध में उतरे तो देर शाम तक समर्थक भी पक्ष में उतर आए।
20 लाख का कपड़ा जब्त करने और अतिक्रमण हटाने में अहम भूमिका
अवैध इकाइयों पर पाली के इतिहास में पहली बड़ी कार्रवाई का श्रेय एसडीएम पारीक को जाता है। उन्होंने हौदे तोडऩे के साथ पहली बार करीब 20 लाख का कपड़ा पकड़ा था। इस कपडे को छुड़ाने के लिए कई प्रकार से दबाव भी आया। लेकिन उन्होंने कपड़ा रिलीज नहीं किया। इसी प्रकार अतिक्रमण हटाने के एक मामले में भी वह भाजपा के जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही।
सोशल मीडिया पर वायरल
इस तबादले के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट विधायक के विरोध में आने लगी। लोगों ने इसे राजनीतिक कारणों से तबादला भी बताया। हैश टैग के साथ इसे ट्रेडिंग भी किया गया। इसके बाद विधायक के पक्ष भी लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए। यह घमासान देर रात तक जारी रहा।
कुछ कार्यकर्ता थे नाराज
कुछ कार्यकर्ता कार्यप्रणाली को लेकर नाराज थे और इसकी शिकायत पूर्व में की थी। वैसे सरकारी अधिकारी के तबादला होते आए हैं। इसमें जनप्रतिनिधि क्या कर सकते हैं।
- ज्ञानचंद पारख, विधायक, पाली।
Published on:
30 Oct 2017 01:14 pm
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