5 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बीमारी के इलाज में लापरवाही कैसे पड़ रही है भारी…यहां पढे़

- बीमारी की शुरुआती स्थिति में उपचार नहीं करवाते लोग - कई तो अब भी ले रहे झाड़ फूंक का सहारा

2 min read
Google source verification

पाली

image

Rajeev Dave

May 28, 2018

Medical news

बीमारी के इलाज में लापरवाही कैसे पड़ रही है भारी...यहां पढे़

पाली. जिले में भले ही चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा होने लगा हो, लेकिन लोग खुद अभी तक अपने सेहत के प्रति सजग नहीं हो पाए हैं। कई बार उपचार में लापरवाही से इंसानों की जान पर भी बन आती है। जिला अस्पताल की बात करे तो पिछले तीन दिनों में ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें शुरुआत स्टेज में चिकित्सकीय परामर्श नहीं लेने से लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसमें ज्यादातर निचले तबके के लोग हैं, जो बीमारी के गंभीर स्थिति में पहुंचने पर ही अस्पताल पहुंच रहे हैं।

केस 1 - जांच करते-करते ही मौत

लेबर कॉलोनी में निवासरत एक दम्पती सोमवार को अस्पताल पहुंचा। महिला ने डॉक्टरों से पति को बुखार आने की बात कही। डॉक्टरों ने जब उसकी जांच की तो जांच करते-करते ही उसकी मौत हो गई। महिला ने चिकित्सकों को बताया वह पिछले चार-पांच दिन से बुखार से पीडि़त था। सोमवार को ज्यादा तबीयत खराब होने पर अस्पताल लाए थे।

केस 2 - सीने में दर्द ने ले ली जान

ट्रोमा सेंटर में मंगलवार रात 12 बजे सर्वोदय नगर से एक मरीज को सीने में दर्द होने पर लागया गया। इमरजेंसी कॉल पर पहुंचे चिकित्सकों ने 10 मिनट तक उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन, उसे बचाया नहीं जा सका। उसकी पत्नी ने बताया कि वह हैदराबाद में काम करता था। 10 दिन पहले ही वह घर आया था। तभी से सीने में दर्द हो रहा था।

केस 3 - झाड़ फूंक पर विश्वास कर गंवाई जान

राइको की ढाणी से बुधवार को एक चार साल की मासूम बच्ची ममता को ट्रोमा वार्ड में लाया गया। लेकिन, महज पांच मिनट में ही मौत हो गई। उसे पिछले चार दिन से ओरी निकलने के कारण तेज बुखार आ रहा था। लेकिन, परिजन उसे चिकित्सकों के पास ले जाने के बजाय झाड़ फूंक करने वाले के पास ले गए। अंतिम समय पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

हृदय रोग सबसे ज्यादा घातक

चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में होने वाली मौत का आंकड़ा नहीं होता है। लेकिन, सबसे ज्यादा ओपीडी में हृदय रोग से जुड़े मरीजों की मौत होती है। लोग अपने सीने में हल्का दर्द होने पर उस पर ध्यान नहीं देते है। लेकिन, जब यह दर्द गंभीर हो जाता है तो इसमें मौत भी हो सकती है।

सेहत से लापरवाही जानलेवा

लोगों का सेहत के साथ खिलवाड़ करना आम बात हो गई है। हम प्रतिदिन अस्पताल में केस देखते हैं, जिसमें मरीज को अंतिम स्टेज में ही उपचार के लिए लाया जाता है। ऐसे में हम पूरा प्रयास करने के बाद भी उसे बचा नहीं पाते है। पिछले तीन दिन में अस्पताल में तीन केस हो चुके हैं, जिसमें मरीज के अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे। लोगों को सेहत के प्रति जागरूक होना चाहिए और दर्द या बुखार होते ही चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

- डॉ. एचएम चौधरी, आचार्य, बांगड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल