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Om Banna : जयंती पर याद किए जा रहे ओम बन्ना सा, जानें सुप्रसिद्ध देवस्वरूप की 10 ‘रहस्यमयी’ बातें

राजस्थान के पाली जिले के चोटिला गांव के प्रसिद्ध देवस्वरूप श्री ओम बन्ना सा की जयंती आज पूरे प्रदेश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है।

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पाली

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Nakul Devarshi

May 05, 2026

Om Banna Sa temple

Om Banna Sa temple

राजस्थान की मरुधरा रहस्यों और लोक देवताओं की कहानियों से भरी पड़ी है, लेकिन आधुनिक युग में जिस एक नाम ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, वह है 'श्री ओम बन्ना सा'। आज उनकी जन्म जयंती के अवसर पर राजस्थान के पाली जिले का चोटिला गांव भक्ति के रंग में डूबा हुआ है। सुबह से ही मंदिर पर भक्तों का तांता लगा है और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

राजनेताओं ने दी शुभकामनाएं, श्रद्धा का सैलाब

ओम बन्ना सा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजस्थान की राजनीति के दिग्गज चेहरों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें याद किया है:

गजेंद्र सिंह शेखावत: केंद्रीय मंत्री ने प्रदेशवासियों को जयंती की शुभकामनाएं देते हुए ओम बन्ना सा के आशीर्वाद की कामना की।


राजेंद्र राठौड़: पूर्व मंत्री ने उन्हें 'जनमानस की आस्था का केंद्र' बताते हुए कोटि-कोटि नमन किया।

मदन राठौड़ और दिया कुमारी: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री ने भी सुप्रसिद्ध देवस्वरूप को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

रविंद्र सिंह भाटी: विधायक भाटी ने उन्हें 'जन-जन का आराध्य' बताते हुए बधाई संदेश साझा किया।

ओम बन्ना सा: जानें 10 हैरान करने वाली बातें

ओम बन्ना सा की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह अटल सत्य है। यहाँ उनके जीवन और मंदिर से जुड़ी 10 ऐसी बातें हैं जो आपको हैरान कर देंगी:

  1. वह काली बुलेट (RNJ 7773): ओम बन्ना (ओम सिंह राठौड़) का साल 1988 में इसी बुलेट से एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।
  2. थाने से गायब होती मोटरसाइकिल: दुर्घटना के बाद पुलिस बुलेट को थाने ले गई, लेकिन अगली सुबह वह फिर से उसी एक्सीडेंट वाली जगह पर मिली।
  3. खाली टंकी, फिर भी सफर: पुलिस ने बुलेट की चेन बांधी, पेट्रोल निकाल दिया, लेकिन फिर भी वह मोटरसाइकिल रातों-रात घटनास्थल पर पहुँच गई।
  4. कोई ताला नहीं रोक पाया: कहा जाता है कि पुलिस ने बुलेट को जंजीरों से भी बांधा, लेकिन वह 'अदृश्य शक्ति' के प्रभाव से बार-बार चोटिला की उसी सड़क पर लौट आई।
  5. सड़क सुरक्षा के देव: आज उस जगह पर मंदिर है। माना जाता है कि यहाँ से गुजरने वाला हर वाहन चालक अगर यहाँ सिर नहीं नवाता, तो उसकी यात्रा में बाधा आ सकती है।
  6. बिना शराब का भोग: ओम बन्ना सा को श्रद्धालु अक्सर विशेष 'भोग' और पुष्प अर्पित करते हैं, लेकिन उनकी महिमा सात्विक आस्था से जुड़ी है।
  7. भक्तों की मनोकामना: केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि हर तरह की मन्नत लेकर लोग यहाँ आते हैं और बाबा उनकी पुकार सुनते हैं।
  8. अखंड ज्योत: मंदिर पर 24 घंटे अखंड ज्योत जलती है और उनकी बुलेट को ही मूर्ति की तरह पूजा जाता है।
  9. पूरी दुनिया में चर्चित: डिस्कवरी और नेशनल जियोग्राफिक जैसे चैनल भी इस 'मिस्ट्री' को कवर कर चुके हैं।
  10. सच्ची श्रद्धा का प्रतीक: चोटिला गांव आज एक बड़ा तीर्थ बन चुका है, जहाँ सालभर मेला जैसा माहौल रहता है।

धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान

जयंती के मौके पर चोटिला धाम में भजन संध्या, भंडारा और पौधरोपण जैसे सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं द्वारा सड़क सुरक्षा की शपथ भी ली जा रही है, जो ओम बन्ना सा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

क्या विज्ञान के पास है इस 'बुलेट' का कोई जवाब?

आज के वैज्ञानिक युग में भी, जब लोग तर्क की बात करते हैं, चोटिला की वह बुलेट विज्ञान को चुनौती देती नजर आती है। आखिर वो क्या शक्ति थी जो बिना ड्राइवर और बिना पेट्रोल के मोटरसाइकिल को थाने से निकालकर एक्सीडेंट वाली जगह ले आती थी? क्या यह केवल एक कहानी है या राजस्थान की मिट्टी का कोई अनसुलझा रहस्य?