
पढि़ए...पाली की पॉलिटिक्स के अंदरूनी किस्से...
बंद मुठ्ठी लाख की...
-राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली। नगर निकाय के वार्डों की लॉटरी तो निकल चुकी। अब सभापति के लिए बेसब्री से इंतजार है। कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में जरूर है लेकिन कॉंफिडेंस कतई नहीं कि चुनाव जीत ही जाएंगे। वह निर्णय नहीं कर पा रही कि सभापति के चुनाव की कमान सीधे मतदाताओं को सौंपें या पार्षदों के हाथ। सूबे के मुखिया सर्वे भी करा रहे हैं कि पार्टी की धरातल पर स्थिति चुनाव जीतने जैसी है भी या नहीं। इस उधेड़बुन में लॉटरी भी नहीं निकल रही। सूबे के मुखियाजी से जो भी निर्णय लें, वास्तविकता तो यही कि पार्टी नेता भी मुठ्ठी बंद रखने में ही भलाई समझ रहे। उन्हें चिंता है कि कहीं ‘हाउड़ी’ का जलवा फिर अरमानों पर पानी न फेर दे।
भारी पड़े हाकम
शहरी सरकार के हाकम ने ‘दो की लड़ाई का फायदा तीसरा उठाए’ वाक्य को ताजा-ताजा ही चरीतार्थ किया है। कद-काठी में भले ही छोटे हों, मगर बुद्धि-चातुर्य का लोहा मनवा लिया। एक ही झटके में गए तो दूसरे झटक में वापस आकर कइयों को झटका दे दिया। यूं तो राज बदलते ही उन्होंने यू टर्न ले लिया था। फिर भी राज वाली पार्टी के कई नेताओं को खटक रहे थे। हाकम ने भी दिमागी तिकड़म भिड़ाया। एक के पाले में चले गए। अब एक धड़ा पैरवी कर रहा तो दूसरा खिलाफत। किस्मत ने भी हाकम का साथ दिया। हाकम ने जिसका हाथ थामा वही उन्हें जीवनदान दिला लाए। अब हाकम मन ही मन मुस्करा रहे कि दो की लड़ाई में खुद का तो भला कर लिया।
सोशल मीडिया पर लूट रहे मजे
निकाय चुनाव की तैयारियां धरातल पर अभी शुरू नहीं हुई। सोशल मीडिया पर चुनावी कैंपेन ने जरूर जोर पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर दावेदारों की बाढ़ आई हुई है। राजनीतिक पार्टियों से दूर-दूर का वास्ता नहीं रखने वाले दावेदार भी सोशल मीडिया पर कम नहीं उतर रहे। अधिकांश तो निकाय चुनाव के बहाने शहरी सरकार की खिंचाई करने में लगे हुए हैं। टिकटों की बंदरबांट जब होगी तब की बात। सोशल मीडिया पर दावेदारी के मजे लूटने में क्यों पीछे रहें, इसी भावना से कई तो खुद को प्रचारित कर रहे हैं। हर गली-मोहल्ले में तैयार हुई ‘फैंसी दावेदारों’ की फौज ने कइयों की नींद जरूर उड़ा दी।
Published on:
24 Sept 2019 03:56 pm
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