कपड़ा नगरी पाली, जिसमे करीब 850 कपड़ा इकाइयां है। इनमे से 550 इकाइयां रेड केटेगरी की है। जिसका अर्थ है, उनसे प्रदूषित पानी का बहिस्राव करती है। इसके अलावा अन्य में पानी का बहाव नहीं होता है। जो इकाइयां प्रदूषित पानी छोड़ती है। उसका अब तक कभी वापस उपयोग नहीं किया जा सका था, लेकिन नवम्बर 2022 से ऐसी तकनीक का उपयोग शुरू हो गया कि प्रदूषित पानी का 90 प्रतिशत से अधिक तक रियूज होने लगा है। अब इसी तकनीक पर आधारित दूसरा जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) प्लांट ट्रीटमेंट प्लांट संख्या छह में तैयार किया जा रहा है। जो दिसम्बर तक पूरा होने की उम्मीद है। सीइटीपी के अध्यक्ष अनिल गुलेच्छा ने बताया कि ये दोनों प्लांट शुरू होने के बाद बांडी नदी में प्रदूषित पानी नहीं जाएगा।
6 नम्बर ट्रीटमेंट प्लांट पुनायता औद्योगिक क्षेत्र में लगा पहला जेएडलटी प्लांट
100 करोड़ रुपए आई थी लागत
2022 नवम्बर में जेडएलडी को शुरू किया गया
12 एमएलडी क्षमता है जेडएलडी प्लांट की
9-10 एमएलडी पानी अभी ट्रीट किया जा रहा जेडएलडी प्लांट से
4 नम्बर ट्रीटमेंट प्लांट में बन रहा है दूसरा जेडएलडी प्लांट
12 एमएलडी ही होगी दूसरे प्लांट की भी क्षमता
5 दिन सप्ताह में चल रही है अभी एक फैक्ट्री
7 दिन पूरे सप्ताह चलेगी दूसरा जेडएलडी प्लांट तैयार होने पर पाली की सभी फैक्टि्रयां
500 करीब फै क्टि्रयां जुड़ी है सीइटीपी से अभी