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वसुंधरा को साइडलाइन करना भाजपा को पड़ सकता है भारी! महिला वोटर्स जगह-जगह कर रही डिमांड

राजस्थान में चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर है। भाजपा पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल रही है। जिसमें राज्य के नेताओं के साथ-साथ केंद्र के मंत्री और भाजपा शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी पहुंच रहे हैं। लेकिन इस बार राज्य में वसुंधरा राजे वैसी भूमिका नजर नहीं आ रही हैं, जैसा पहले वो दिखा करती थी।

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पाली

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Sanjay Kaushik

Sep 18, 2023

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महिलाओं से घिरी राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर है। भाजपा पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल रही है। जिसमें राज्य के नेताओं के साथ-साथ केंद्र के मंत्री और भाजपा शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी पहुंच रहे हैं। लेकिन इस परिवर्तन यात्रा में राज्य की पूर्व सीएम और राजस्थान में भाजपा का चेहरा मानी जाने वाली वसुंधरा राजे बहुत कम दिख रही है। 2013 या 2018 के चुनाव में वसुंधरा जिस तरह पूरे राजस्थान को लीड कर रही थी, इस बार वो वैसी भूमिका में अभी तक नजर नहीं आई है।

सियासी गलियारों में चर्चा में भाजपा वसुंधरा को साइडलाइन कर चल रही है। आधिकारिक तौर पर इस पर अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा है लेकिन जो हालात दिख रहे हैं उससे यही नजर आ रहा है। लेकिन चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा को वसुंधरा राजे को साइडलाइन करना भारी पड़ सकता है।

वसुंधरा राजे की लोकप्रियता अब भी राज्यस्थान में भाजपा के अन्य नेताओं से अधिक है। इसकी झलक परिवर्तन यात्रा से एक दिन पहले वसुंधरा के देव दर्शन कार्यक्रम में भी देखने को मिली थी। वसुंधरा खास कर महिलाओं में बेहद लोकप्रिय हैं।

ऐसे में राज्य के कई इलाकों में महिलाएं भाजपा की रैली और सभाओं में वसुंधरा को तलाश रही हैं। लेकिन उनके नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लग रही है। हाल के दिनों परिवर्तन यात्रा के दौरान कई जगह वसुंधरा को कमान दिए जाने की बात महिलाओं ने उठाई। हालांकि उनकी आवाज वैसी बुलंद नहीं थी कि यह मुद्दा बन जाए।

महिलाओं का कहना है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के बिना बीजेपी की रैली फीकी ही रहेगी। महिला कार्यकर्ताओं ने तो वसुंधरा राजे को सीएम फेस बनाने की मांग कर दी है। बता दें कि बीजेपी के लिए महिला वोटर्स सॉलिड वोट बैंक हैं। जब वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री थीं तब महिलाओं में पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरे के रूप में विख्यात थीं।

ऐसा माना जा रहा है कि फिर से उस सॉलिड वोट बैंक को एकजूट करने के लिए वसुंधरा राजे की मौजूदगी जरूरी है। महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ वसुंधरा ही वो ताकत रखती हैं जो महिला वोटरों को बीजेपी की तरफ खींच सकें।

बीजेपी के लिए महिला वोटर्स का विश्वास जीतना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में मतदान के मामले में उन्होंने पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन किया है। चाहे 2013 हो या 2018, महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 1% अधिक था। जनसभा में कुर्सियां खाली देख के बीजेपी कार्यकर्ता और खासकर महिलाएं चाहती हैं कि गहलोत को हराने के लिए वसुंधरा राजे को ही सीएम का चेहरा बनाया जाए।

वसुंधरा को देनी होगी कमान तभी बनेगी बात
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का अंतर कांग्रेस की तुलना में वोट शेयर का महज 0.5% था। लेकिन इस बार बीजेपी महिला प्रवासी अभियान के माध्यम से महिला मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसका मकसद 5 प्रतिशत वोटों के मामूली अंतर से हारी हुई सीटों को फिर से हासिल करना है।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के बीच अपनी मजबूत छवि के कारण वसुंधरा को अभियान में सबसे आगे रहना होगा।वसुंधरा से जुड़े सवाल पर भाजपा के नेता कह रहे हैं कि वो हमारी पार्टी की वरिष्ठ नेता है। बहुत जल्द वो चुनावी अभियान में दिखेगी।

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