राजीव दवे. पाली। प्रदेश के जिन स्कूलों में कभी बारहखड़ी और गिनती के स्वर गूंजा करते थे। उनमें इन दिनों जाम टकराने और मवेशियों के रंभाने की आवाज आती है। प्रदेश में वर्ष 2014 में एकीकरण के नाम पर 17 हजार से अधिक स्कूल माध्यमिक या उच्च माध्यमिक में मर्ज किए गए थे। इस निर्णय से कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के भवन खाली हो गए। उनमें आज मवेशियों या समाजकंटकों का राज है। करोड़ों रुपए के ये भवन जर्जर हो रहे है, लेकिन शिक्षा विभाग और सरकार ने आंखें मूंद रखी है। पाली जिले में ऐसे 73 भवन हैं।
मर्ज किए थे 386 स्कूल
एकीकरण व कम नामांकन के आधार पर शिक्षा विभाग की ओर से जिले में 386 स्कूलों को मर्ज किया गया था। इनमें से 305 स्कूल भवन तो मर्ज स्कूल के साथ संचालित होने लगे। उनमें विद्याथीZ आज भी आ रहे हैं, लेकिन 81 स्कूलों पर ताला लग गया। इन 81 स्कूलों में से तीन स्कूल फिर शुरू किए गए। जबकि 6 स्कूल राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम को दिए गए। शेष सभी स्कूल भवन जर्जर हो रहे है।
ब्लॉकवार इतने स्कूल भवन वीरान
बाली ब्लॉक में 3, मारवाड़ जंक्शन ब्लॉक में 6, पाली ब्लॉक में 8, रायपुर ब्लॉक में 9, रोहट ब्लॉक में 2, रानी ब्लॉक में 2, सोजत ब्लॉक में 11, सुमेरपुर ब्लॉक में 11, जैतारण ब्लॉक में 19 स्कूल भवन वीरान पड़े हैं।
भवन के दरवाजे व खिड़कियां तक गायब
शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूल भवनों की तरफ ध्यान नहीं देने के कारण भूमाफिया भी इन स्कूलों पर नजर लगाए हुए है। कई स्कूल भवनों के कमरों व खिड़कियों के दरवाजे तक गायब हो चुके हैं। कइयों में मुख्यद्वार तक टूटे गए हैं।
विद्यालय प्रबंधन समिति दे सकती है किराए पर
जो भवन वीरान पड़े हैं और खंडहर हो रहे हैं। उनके संबंध में स्कूल अपने स्तर पर निर्णय कर सकता है। विद्यालय प्रबंधन समिति प्रस्ताव लेकर उन भवनों को सामाजिक कार्यों के साथ अन्य कार्यों के लिए किराए पर दे सकती है। किसी सरकारी कार्यालय की आवश्यकता होने पर भी भवन दिया जा सकता है।
राहुल राजपुरोहित जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय पाली
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टॉपिक एक्सपर्ट
विद्यालयों को मर्ज करने पर यह निर्देश दिए गए थे कि उनका उपयोग पंचायत के कार्य, सरकारी विभागों के उपयोग या अन्य कार्य में किया जाएगा। इन भवनों के लिए पंचायत समिति व संस्था प्रधान मिलकर निर्णय कर सकते थे। कलक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनी है। जो भवनों को लेकर निर्णय कर सकती है। इन भवनों पर ध्यान नहीं देने के कारण ये खण्डहर बन रहे है। इनका रंगरोगन आदि करवाकर बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
नूतनबाला कपिला, सेवानिवृत्त् अतिरिक्त निदेशक, बीकानेर, शिक्षा विभाग