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जातीय वोट बैंक में सेंधमारी करने वाले की होगी धमक

-जैतारण विधानसभा क्षेत्र...

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पाली

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Suresh Hemnani

Nov 30, 2018

Rajasthan Legislative Assembly election 2018

जातीय वोट बैंक में सेंधमारी करने वाले की होगी धमक

वसुंधरा सरकार में कद्दावर मंत्री और उनके करीबी रहे सुरेन्द्र गोयल का इस बार टिकट काटकर एक युवा चेहरे अविनाश गहलोत को मैदान में उतारा गया। गोयल ने बगावत का झण्डा उठा लिया। कांग्रेस के टिकट पर इस बार दिलीप चौधरी मैदान में हैं। इसके अलावा कांग्रेस से भी बगावत कर एक और प्रत्याशी राजेश कुमावत अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे हैं। इससे मुकाबला चतुष्कोणीय और दिलचस्प हो गया है। जातिगत गणित, विकास और परिवर्तन के मुद्दों से यहां चुनावी समीकरण बदल रहा है।

चैनराज भाटी
जैतारण। सुरेन्द्र गोयल जैतारण से पांच बार विधायक रहे और दो कार्यकाल में वसुंधरा सरकार में अलग-अलग अहम विभागों के मंत्री भी रहे। वह इस सीट पर 1980 से लगातार मैदान में उतर रहे हैं। इस बार उनका टिकट कटना सभी को चौंका गया। उन्हें ये नागवार गुजरा और पार्टी के खिलाफ खड़े हो गए। कहते हैं उनके टिकट कटने में आरएसएस का अहम रोल है। टिकट कटने के बाद अब वह आरएसएस पर निशाना साधकर इसे भुनाने की कोशिश में हैं। गोयल का बीस साल से मुकाबला कर रहे और अशोक गहलोत सरकार में संसदीय सचिव रहे दिलीप चौधरी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। वह 2008 में गोयल को हरा भी चुके हैं। यानी दो दशक से प्रतिद्वंद्वी एक बार फिर खम ठोक रहे हैं। भाजपा ने गोयल का टिकट काट नए चेहरे अविनाश गहलोत को मौका दिया। कुल बीस प्रत्याशियों के मैदान में होने का असर ये है कि पूरे क्षेत्र में टेम्पो आदि पर प्रचार का शोर सुनाई देता है। कोई मुखर होकर नहीं कहता, लेकिन लोग ये मानते हैं कि परिवर्तन होना ही चाहिए।

एक दम बदल गई फिजां
इस बार चार दमदार प्रत्याशियों के सियासी रण में कूदने से जैतारण की फिजां एकदम बदली हुई है। गांव हो या शहर, गली हो या चौराहे हर जगह आपको भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बैनर, होर्डिंग व झण्डियां आदि लगे मिलेंगे। हर गांव या गली में आपको चुनावी चकल्लस करते लोग मिल जाएंगे। जीत हार को लेकर यहां सबके अपने तर्क हैं और दावे-प्रतिदावे। सभी प्रत्याशी जातिगत गुणा-भाग लगाकर सीट निकालने के जतन में जुटे हैं।

चलते-चलते चुनावी माहौल
शाम ढल चुकी है, सूर्य अस्तांचल हो चला है। हल्का अंधकार छाने से रोड लाइटें भी जल उठी हैं। जैतारण राजकीय अस्पताल के सामने चाय की एक थड़ी पर कुछ वृद्धजन, युवा चाय की चुस्कियों के साथ चुनावी चर्चा कर रहे हैं। हमने वहां मौजूद जैतारण निवासी बाबूलाल उर्फ मोटा से चुनावी माहौल की बात की तो उनके मुंह से निकला कि इस बार तो विकास मुद्दा रहेगा। हर बार एक ही व्यक्ति नहीं युवाओं को मौका देना चाहिए। मतदाता जरूर मौन और सजग है, लेकिन योगी की सभा के बाद माहौल बदलेगा। उनके पास बैठे साठ वर्षीय कर्माराम चौहान ने कहा कि मतदाताओं के मन की बात कोई नहीं जान सकता, लेकिन जाति गणित भी मायने रखती है। युवा चैनाराम सिंगारिया बीच में बोल पड़े, इस बार सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है। मैं भी युवा हूं, लेकिन रोजगार नहीं मिला। वहीं मौजूद एक किशोर ने बताया कि अब सारा खेल जातिगत गणित पर है, हर कोई जातियों को पक्ष में करने में जुटा है। थड़ी पर मौजूद लोगों की आवाज थी कि वे अपना जवाब सात दिस बर को मतदान करके ही देंगे।

उन लोगों की राय में सरकारें आती जाती रही, लेकिन जैतारण शहर की गलियों में सडक़ों का हाल, गांवों में पानी की किल्लत, शहर में सीवरेज से टूटी सडक़ों की समस्याएं कम नहीं हुई। इसके बाद अस्पताल के पीछे की सडक़ पर कुछ लोगों से चर्चा में लगा कि परिवर्तन लाजमी है। गीता भवन रोड से निकलते समय कुछ कार्यकर्ता सुरेन्द्र गोयल की जय बोलते दिखे। बस स्टैण्ड वाले रास्ते में दिलीप चौधरी के कार्यालय में भी भीड़ थी। बस स्टैण्ड तक रास्ते में कई टेम्पो, भोंपू प्रचार करते मिले तो, पूरा शहर चुनावी रंग में रंगा हुआ दिखा। बस स्टैण्ड पर हाथ ठेलों, दुकानों के बाहर खड़े लोग इस बार विकास, जातिगत गणित, बेरोजगारी, सडक़, परिवहन जैसे मुद्दों पर बात करते दिखे। जैतारण में वोल्वो बस नहीं आती, जवाई का पानी गांवों में नहीं पहुंचा जैसी शिकायतें आम रही। हनुमान मंदिर, प्राइवेट बस स्टैंड, फौजी चौराहा, गोशाला चौराहा के इलाकों में पहुंचे तो अलग-अलग दावे करते शहरवासी मिल गए।

जातिगत गणित में उलझा समीकरण
हमने जब प्रत्याशियों से उनकी जीत की संभावनाएं और गणित जानने की कोशिश की तो समझ आया कि जैतारण में दिलीप चौधरी की जाट व मुस्लिम वोटों पर नजर है। अविनाश गहलोत माली समाज, पार्टी के कमिटेड वोट व युवाओं को साथ लेने की बात कर रहे हैं। सुरेन्द्र गोयल कुमावत समाज व भाजपा संगठन के कुछ लोगों को साथ लेकर चलने से मजबूती का दावा कर रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी राजेश कुमावत भी तीनों प्रमुख नेताओं के समीकरण बिगाडऩे का दावा कर रहे हैं। अन्य निर्दलीय प्रत्याशी कृष्ण सिंह गुर्जर रास इलाके में गुर्जरों के वोट पर पकड़ रख समीकरण बदल रहे हैं। मगरा क्षेत्र में रावत समाज, मेहरात-काठात वोटर पर सभी प्रत्याशियों की नजर है। कुल मिलाकर जैतारण में मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है और यह प्रदेश स्तर हॉट सीट बनी हुई है। योगी की सभा को बाद हर कोई अपनी-अपनी गणित नए
सिरे से गिन रहा है।

फैक्ट फाइल
बूथ-308
प्रत्याशी-20
कुल मतदाता-
2 लाख 77 हजार 972
महिला मतदाता-
1 लाख 33 हजार 930
पुरुष मतदाता-
1 लाख 44 हजार 42

जातिगत गणित
माली -10. 30 प्रतिशत
कुमावत - 10.10 प्रतिशत
मुस्लिम - 9.80 प्रतिशत
रावत - 11.15 प्रतिशत
मेहरात-काठात - 8 प्रतिशत
एससीएसटी - 22 प्रतिशत
गुर्जर -5 प्रतिशत
राजपूत, राजपुरोहित व रावणा राजपूत -9 प्रतिशत
अन्य -15 प्रतिशत
आंकड़े लगभग में
पन्द्रह साल से
ये विधायक
2003- सुरेन्द्र गोयल
2008-दिलीप चौधरी
2013-सुरेन्द्र गोयल

दोनों प्रत्याशी का हाल क्या है?
अविनाश गहलोत, भाजपा
ताकत: भाजपा का कैडरबेस वोट बैंक, आरएसएस का सहयोग, युवा चेहरा और जातिगत पकड़
कमजोरी: पार्टी के पर परागत वोटों में सेंध, बगावत के कारण पार्टी मतों में बंटवारा

दिलीप चौधरी, कांग्रेस
ताकत: पर परागत सीट, पार्टी का वोट बैंक, जाट व मुस्लिम मतों का सहारा
कमजोरी: विपक्ष में रहने के कारण कोई विशेष काम नहीं करा पाए, कांग्रेस नेता राजेश कुमावत की बगावत से पार्टी मतों का बंटवारा, कुमावत वोट बैंक में सेंध