
हर माह तीन करोड़ का पान-मसाला चबाकर बीमार हो रहा था पाली
पाली . तंबाकू-गुटखा और पान-मसाला भले ही स्वास्थ्य के लिए घातक है, बावजूद इसके पाली जिले के लोग करीब डेढ़ करोड़ का गुटखा-पान मसाला हर माह चबाकर थूक देते थे। इसमें फ्लेवर सुपारी जैसे उत्पाद शामिल करें तो यह आंकड़ा तीन करोड़ से अधिक का हो जाता है, यह आंकड़ा व्यापारियों से बातचीत के आधार पर सामने आया है। अब सरकार ने गुटखा-पान मसाला और फ्लेवर्ड सुपारी पर रोक लगा दी है। अब इसके आदी हो चुके लोगों को गुटखा-तंबाकू का मोह छोडऩा होगा। सरकार ने बुधवार को जैसे ही यह आदेश जारी किया, तंबाकू-गुटखा आदि बाजार से गायब हो गया। कई दुकानदार शटर डाउन कर घर चले गए। हालांकि, चिकित्सा विभाग ने सरकार की कोई गाइड लाइन नहीं मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बावजूद गुटखा और पान-मसाला खुले में नहीं बिका।
दुकानदारों के पास पड़े पाउच
गुटखा, पान-मसाला के होलसेल विक्रेताओं ने बताया कि जिले के बड़े व्यापारियों से लेकर गली-मोहल्लों में पान का केबिन व किराणा की दुकान संचालित करने वाले के पास पान-मसाला व गुटखे के पाउच पड़े है। वह नहीं बिकेंगे तो छोटे-बड़े सभी व्यापारियों को लाखों रुपए का नुकसान होगा। व्यापारियों की माने तो अभी स्टॉक में ही करोड़ों रुपए का माल पड़ा है।
कैंसर के मुंह में नहीं जाएंगे लोग
बांगड़ मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीण गर्ग ने बताया कि पान मसाला और गुटखा मुंह और फेफड़े के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। हर रोज तंबाकू जनित बीमारियों से सैकड़ों लोग सामने आते हैं। बांगड़ अस्पताल में प्रतिमाह कैंसर के करीब 15 रोगी पहुंच रहे है। जिनमें से अधिकतर मुंह के कैंसर से पीडि़त है।
लाखों का गुटखा छुपाया
पान-मसाला, गुटखे पर प्रतिबंध का आदेश आते ही जिले के व्यापारियों ने गुटखे और पान-मसाले के साथ फ्लेवर्ड सुपारी को स्टाक छुपा लिया। पाली शहर में हॉलसेल का कार्य करने के साथ थड़ी पर यह सामग्री बेचने वाले दुकानों व केबिनों पर ताले लगाकर चले गए। इधर, शहर में कई जगह पर तलबदारों को विक्रेताओं ने दो से तीन गुना अधिक दाम लेकर भी यह सामग्री बेची।
गाइड लाइन आने पर करेंगे कार्रवाई
सीएमएचओ आर.के. मिर्धा ने बताया कि राज्य की जनता का स्वास्थ्य सुधारने की मंशा से राज्य सरकार ने पान-मसाला एवं फ्लेवर्ड सुपारी पर बैन लगाया है। इनमें मिले हानिकारक पदार्थ कैंसर सहित कई गंभीर रोग देते है। मुख्यालय से गाइड लाइन मिलने के बाद इसको लेकर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
रोगियों केे आंकड़ों में आएगी कमी
- गुटखा, पान-मसाले और फ्लेवर्ड सुपारी पर प्रतिबंध का निर्णय तारीफ के काबिल है। इसमें आने वाले कंटेट सेे गले, मुंह व श्वास नली में कैंसर का रोगी बनाने का सबसे बड़ा कारण है। इस पर पाबंदी का असर आने वाले कुछ ही वर्षों में देखने को मिलेगा। राज्य में कैंसर से पीडि़त रोगियों की संख्या में निश्चित रूप से कमी आएगी।
- डॉ. राजेन्द्र सिंघवी, अध्यक्ष नशा मुक्ति केन्द्र, पाली
दो हजार लोगों को छुड़ाया गुटखा-पान मसाला
याख्याता के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद नशा मुक्ति केन्द्र से जुड़ा। गांवों में जाकर कैंप लगाए। टीम के साथ मिलकर अभी तक दो हजार से ज्यादा लोगों को प्रेरित कर, दवाइयां देकर गुटखा-पान मसाला छुड़ाया। सरकार के इस कदम की सराहना करते है।
- वि_ल भाई सांखला, प्रभारी, नशा मुक्ति केन्द्र, पाली
Published on:
03 Oct 2019 05:05 am
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