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‘संक्रमण’ की चेन टूटेगी भी तो कैसे… यहां तो लॉकडाउन में भी खुल रहे शटर

-शहर में सख्त लॉकडाउन के बावजूद दुकानदार बंद नहीं रख रहे प्रतिष्ठान

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पाली

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Suresh Hemnani

May 12, 2021

‘संक्रमण’ की चेन टूटेगी भी तो कैसे... यहां तो लॉकडाउन में भी खुल रहे शटर

‘संक्रमण’ की चेन टूटेगी भी तो कैसे... यहां तो लॉकडाउन में भी खुल रहे शटर

पाली। शहर में सख्त लॉकडाउन के चलते पुलिस की ओर से सख्ती करने के बावजूद ऐसे नजारे आम रहे। दुकानदार और ग्राहक दोनों चोरी छिपे सामाने बेचते व खरीदते रहे। पुलिस के आला अधिकारियों ने शहर की सडक़ों पर वाहनों में बैठकर दौरा भी किया, लेकिन उनके नजरों से ओझल होते ही फिर खरीद-फरोख्त का खेल शुरू हो गया। ये ऐसे लोग है जिनको कोरोना की चेन तोडऩे से सरोकार ही नहीं लगता है। वे तो अपने व्यापार और लाभ के लिए कुछ भी करने को तैयार है। जबकि कोविड 19 का काल रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का जीवन लील रहा है।

दृश्य एक : लोढ़ा स्कूल के सामने
सख्त लॉकडाउन में दुकान बंद होने का सुबह 11 बजे समय है। इसके बार करीब बारह बजे लोढ़ा स्कूल के सामने बेकरी की दुकान का शटर थोड़ा सा ऊपर कर उसके आगे कैरेट रख दिए गए जिससे किसी की नजर नहीं पड़े। बाहर एक आदमी बैठा दिया गया। जो किसी के भी आने पर गली में या सामने जाकर तुरन्त सामग्री दे देता।

दूश्य दो : पुराना बस स्टैण्ड
सख्त लॉकडाउन व कोतवाल के इस क्षेत्र से गुजरने के बाद तुरन्त एक फोटो स्टेट वाले ने दुकान का शटर खोल दिया। वहां फोटो कॉपी करना भी शुरू कर दिया। इसके आगे चंद कदमों की दूरी पर डेयरी वाले ने शटर बंद रखा था, लेकिन बजाने पर थोड़ा सा शटर ऊपर कर दूध, दही या अन्य सामग्री देता रहा।

साहब गेहूं नहीं लाएंगे तो खाएंगे क्या
अहिंसा सर्किल पर दोपहर 12.20 बजे पुलिस ने एक ऑटो चालक को रोका और उसका चालन बनाकर जाने को कहा। इस पर वह बोला गरीब आदमी है...राशन का गेहूं लेने गया था...गेहूं नहीं लाएंगे तो भूखे मरेंगे...। इस पर पुलिसकर्मी ने कहा कि आप ग्यारह बजे पहले चले जाते तो वह बहस करने लगा। इसके बाद उसे एक बार तो जीप में बैठाकर क्वॉरंटीन करने भेजा जाने लगा, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया।

हर कोई बनाता बहाना
कई लोग तो बिना किसी काम के सडक़ों का नजारा देखने के लिए निकल रहे है। सूरजपोल पर पुलिसकर्मी के पकडऩे पर हर किसी का एक ही कहना होता है अस्पताल गया था। रिश्तेदार को खाना देने या देखने। यह बहाना नहीं चले तो जेब से चिकित्सक की पर्ची निकालकर दवा लेने जाने का कहकर निकल जाते हैं। पुलिसकर्मी भी दवा या डॉक्टर का सुनकर उन्हें मजबूरी में नहीं पकड़ पा रहे हैं।