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रक्षाबंधन विशेष: यहां ननद-भाभी का कमाल, विदेशों तक फैली पाली के स्नेह की डोर

रक्षाबंधन से पांच महीने पहले शुरू हो जाता कार्य

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रक्षाबंधन विशेष: यहां ननद-भाभी का कमाल, विदेशों तक फैली पाली के स्नेह की डोर

रक्षाबंधन विशेष: यहां ननद-भाभी का कमाल, विदेशों तक फैली पाली के स्नेह की डोर

कपड़ा नगरी के नाम से ख्यात पाली शहर ने भाई-बहनों के स्नेह की प्रतीक राखी की एक्सक्लूजिव डिजाइनिंग में भी अपनी अलग छाप छोड़ी है। यहां की राखियां देश के शहर-कस्बों ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार व्यवसायरत भाई-बहनों के स्नेह की डोर को मजबूत कर रही है। खास बात ये है कि यहां पर तैयार होने वाली सिल्वर व गोल्ड कॉइन की राखी की दीवानगी तो गजब की है। ये एक्सक्लूजिव राखियां ननद-भाई की जोड़ी खास तौर पर तैयार करवाती है। यदि शहर की बात करे तो शहर में रक्षाबंधन त्योहार की सीजन में करीब पांच माह पहले ही राखी बनाने का कार्य शुरू हो जाता है। मात्र एक महीने चलने वाले इस व्यवसाय में कुछ नामी व्यवसायी है, तो ननद-भाभी की जोड़ी भी है, जो घर की कामकाजी महिलाओं से राखी बनवाने के साथ उनको रोजगार प्रदान कर आत्मनिर्भर बना रही है।
कामकाजी महिलाओं को संबल
महिलाएं शहर में राखी उद्योगों के प्रतिष्ठानों से सामान ले जाती है तथा घर पर राखी बनाने का काम करती है। राखियां बनने के बाद वापस देकर जाती हैं। इस काम से महिलाएं दस से पन्द्रह हजार रुपए महीने तक कमाई कर लेती है। इन्हीं महिलाओं के हाथों से तैयार राखियां पूरे देश में अलग-अलग जगह पहुंच रही है।

ननद-भाभी की जोड़ी कर रही कमाल, महिलाओं को दे रही रोजगार
राखी के व्यवसाय में ननद-भाभी की जोड़ी भी कमाल कर रही है। शहर के गुंदोचिया बास निवासी सोफ्टी बलाई बताती है कि होममेड राखी बनाने का विचार आया तो 2015 में व्यापार शुरू किया। सास मधु बलाई व पति अमृत बलाई ने प्रोत्साहन दिया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसमें भाभी मेघा सर्राफ का खास सहयोग रहा। उसके बाद ननद-भाभी की जोड़ी ने विभिन्न डिजाइन तैयार कर घरेलू महिलाओं से राखी बनवाना शुरू किया, जो अब भी जारी है। शादी के बाद आने वाली पहली राखी के लिए सिल्वर-गोल्ड की राखी खास तौर पर तैयार करवाई जाती है। बकौल, सॉफ्टी, रक्षा बंधन से पहले डिजाइन तैयार कर 20 से ज्यादा महिलाओं को काम देते हैं, जिससे उन्हें भी संबल मिलता है। इतना ही नहीं, रीमा जैन सात साल से सखी सहेली प्रदर्शनी के जरिए महिलाओं को राखी बनाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है।

सौ से ज्यादा महिलाओं को मिला रोजगार
राखी व्यवसायी राजकुमार धोका बताते है कि शहर के लोगों को पाली में ही सस्ती राखी मिले इस सोच के चलते राखी बनवाना शहर में शुरू किया। घरेलू महिलाओं ने इसमें अधिक रुचि दिखाई। उन्हें घर बैठे काम मिलने लगा। राखी बनाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती चली गई। अब करीब 100 से ज्यादा महिलाएं राखी बनाने का काम करती है। हर साल एक हजार नए तरह के डिजाइन राखियों में शामिल हो जाते हैं। इस बार महिलाओं ने मोदी राखी, नजरबट्टु राखी, जदोZजी, एडिस्टोन की नई डिजाइन में राखियां तैयार की है।