पाली। राजकीय बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के आउटडोर में कभी सर्वर डाउन के नाम पर तो कभी इंटरनेट खराब होने से पर्ची काउंटर पर बैठे कार्मिक को हाथ से नाम लिखने पड़ते हैं। पर्ची के नम्बर की रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ती है। नतीजा एक पर्ची काटने में तीन से चार मिनट का समय गुजर जाता है। ऐसे में मरीजों को एक से डेढ़ घंटे तक महज पर्ची कटाने के लिए ही खड़े रहना पड़ता है। अस्पताल के आउटडोर में पर्ची बनाने के लिए बनी एक खिड़की पर पुरुषों की तो दूसरी पर महिलाओं की लम्बी कतार लगी रहती है। दर्द का उपचार कराने पहुंचे कई मरीजों की खड़े रहने की क्षमता नहीं होती, लेकिन पर्ची हाथ से बनने के कारण दर्द सहते हुए भी मरीजों को धूप में इंतजार करना पड़ता है।
एक काउंटर में महज एक कार्मिक
आउटडोर में पुरुषों की पर्ची बनाने वाले काउंटर में दो कम्प्यूटर सेट व प्रिंटर लगे है, लेकिन कार्य एक ही व्यक्ति कर पाता है। वहां लगा एक कम्प्यूटर पिछले कई दिनों से खराब है। इसकी अस्पताल प्रशासन को कार्मिकों ने सूचना भी दी है, लेकिन उसे ठीक नहीं करवाया जा रहा है।
हर बार कम्प्यूटर खराब
बांगड़ अस्पताल में पर्ची कटवाना जंग जीतने जैसा है। मैं पिछले बीस दिन में तीसरी बार दवा लेने आया हूं। हर बार पर्ची कटाने के लिए ही एक से ड़ेढ घंटे तक खड़े रहना पड़ा। काउंटर पर पूछा तो हर बार जवाब मिला कम्प्यूटर कार्य नहीं कर रहा। इस कारण समय लग रहा है।
मोहनलाल, मरीज
सुबह से हो जाती दोपहर
बांगड़ अस्पताल में पर्ची कटाने में बहुत देर लगती है। बताया कि सर्वर काम नहीं कर रहा है। आज भी ऐसा ही हाल है। इसके बाद चिकित्सक कक्ष के बाहर खड़े रहना पड़ता है। दवा लेने के लिए भी कतार में आधे-पौन घंटे तक खड़े रहना पड़ता है। यहां आने पर सुबह से दोपहर हो जाती है।
चेतनसिंह, मरीज