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मारवाड़ के निवासियों की सुगाली माता के प्रति है अटूट भक्ति व आस्था

नवरात्रा विशेष - आऊवा गांव में स्थित है सुगाली माता मंदिर

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मारवाड़ के निवासियों की सुगाली माता के प्रति है अटूट भक्ति व आस्था

आऊवा. गांव स्थित सुगाली माता मंदिर के प्रति लोगों में अटूट आस्था है। गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित सुगाली माता के मंदिर तक जाने के लिए कच्ची सडक़ है। नवरात्र के साथ अन्य दिनों में भी ग्रामीण इस मंदिर में मत्था टेकने के लिए पैदल तक जाते हैं।
सुगाली माता आऊवा राजघराने की कुल देवी है। माता की प्राचीन प्रतिमा को ब्रिटिश काल के दौरान अंग्रेज सैनिक खंडित कर मंदिर से ले गए थे। प्राचीन प्रतिमा के 54 हाथ व 10 मस्तक है। प्रतिमा काले पत्थर की बनी है। अब प्राचीन मूर्ति के समान ही नई प्रतिमा पेनोरमा में स्थापित की गई है। जबकि माता के मंदिर में दो मूर्तियां है। जिनका निर्माण् व प्रतिष्ठा नाहरसिंह की ओर से करवाई गई थी। ग्रामीणों के अनुसार 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मे सुगाली माता की कृपा से क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। पुजारी दिनेश गोस्वामी ने बताया कि नवरात्र में सुबह से शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवजाही रहती है।
इसी जन्म में मिलता कर्मों का फल : जैन संत
रायपुर मारवाड़. संत पदममुनि ने कहा कि संसार में किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। एेसा करने से स्वयं को सुख प्राप्त होता है। वे रविवार को कस्बे के जैन स्थानक में जयमल जैन संघ की ओर से चल रहे चातुर्मास के तहत प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पहले मनुष्य इस जन्म में किए अच्छे-बुरे कर्मों का फल अगले जन्म में भुगतता था। अब भगवान ने भी पाप व पुण्य का हिसाब इसी जन्म में करना शुरू कर दिया है। मनुष्य जितने अच्छे कर्म करता है । उसी के अनुसार उसे सुख मिलता है। छल-कपट करने पर अशांति व गृह कलेश आदि मिलते हैं। दौलत के फेर में अंहकारी होने वाला व्यक्ति सदैव दुखी रखता है। उन्होंने कहा कि जैसा जीवन खुद चाहते हो वैसा दुसरों को भी जीने का अवसर देना चाहिए। संत जयेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य की वाणी में बड़ा बल होता है। वाणी से ही मनुष्य के संस्कारों का पता चलता है। मनुष्य को कम बोलने के साथ मीठा व सम्माजनक बोलना चाहिए।